Tuesday, January 24, 2012

देश से पोलियो के सफाए का दावा


दो साल तक पोलियो पर कड़ी नजर रखी जाएगी। विशेषज्ञों की राय है कि देश में पोलियो का वायरस बेशक निष्क्रि य या खत्म हो गया हो लेकिन आगामी दिनों में इसके नए रूप में सामने आने का खतरा बना रहेगा। स्वास्थ्य मंत्रालय में संयुक्त सचिव अनुराधा गुप्ता ने बताया, ‘ पिछले एक साल से पोलियो का कोई भी नया मामला सामने नहीं आया है। लेकिन हम अगले दो साल तक पोलियो पर कड़ी निगरानी रखेंगे ताकि यह बीमारी फिर से सिर नहीं उठा सके।
वर्ष 2011 में 13 जनवरी को एक मामला पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले में सामने आया था जिसमें पता चला था कि 18 महीने की एक बच्ची पोलियो से प्रभावित है। लेकिन इसके बाद से देश भर में कहीं से पोलियो का कोई मामला सामने नहीं आया है। जवाहर लाल नेहरू विविद्यालय में लाइफ साइंस के प्रोफेसर पीसी रथ कहते हैं, ‘
टीके से बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है जिससे पोलियो का वायरस उन पर असर नहीं करता है। लेकिन आगामी दिनों में पोलियो का जड़ से उन्मूलन चुनौती बना रहेगा। यह भी डर रहेगा कि इसका वायरस फिर से किसी नए रूप में सामने न आ जाए।
अनुराधा गुप्ता ने बताया कि वर्ष 2009 में तो यह स्थिति थी कि वि भर के कुल मामलों में से करीब 50 प्रतिशत मामले भारत में ही पाए गए थे। उस वर्ष पोलियो के 741 नये मामलों का पता चला था लेकिन 2010 में सिर्फ 18 नए मामले ही प्रकाश में आए। 1978 के आसपास तो आलम यह था कि लगभग दो लाख बच्चे प्रतिवर्ष पोलियो से प्रभावित हो जाते थे। पोलियो के वायरस के उन्मूलन के लिए देश भर में बड़े पैमाने पर अभियान चलाया गया था जिसके लिए फिल्म अभिनेता अमिताभ बच्चन, क्रि केटर सचिन तेंदुलकर जैसी नामी गिरामी हस्तियों के अलावा धर्म गुरुओं से बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाने की अपील करवाई गयी और इस अभियान को दो बूंद जिंदगी कीका नारा दिया गया। संयुक्त सचिव ने बताया कि पोलियो पर इतनी बड़ी सफलता राजनीतिक और सामाजिक प्रतिबद्धताओं के चलते हासिल हुई है लेकिन दूसरे देशों से आने वाले पोलियो के वायरस को रोकना अब भी एक बड़ी चुनौती बनी हुयी है। अब भी वि के तीन अन्य देशों में पोलियो के मामले हैं जिनमें अफगानिस्तान, पाकिस्तान और नाइजीरिया शामिल हैं। पोलियो उन्मूलन के लिए देश में अब तक 12 हजार करोड़ रुपए से अधिक की धनराशि खर्च की गयी है। वर्ष 1988 में वि स्वास्थ्य संगठन ने 2000 तक वि से पोलियो उन्मूलन का लक्ष्य रखा था लेकिन यह संभव नहीं हो सका और भारत में पिछले एक दशक के दौरान लगभग 95 प्रतिशत मामले बिहार और उत्तर प्रदेश में सामने आए। देश में पश्चिमी उत्तर प्रदेश, मध्य बिहार, पश्चिम बंगाल का मुर्शिदाबाद जिला, झारखंड का पाकुड़ जिला कुछ ऐसे स्थान हैं जहां पर लंबे समय तक पोलियो बड़ी चुनौती बना रहा। ऐसे में पोलियो फिर से सिर न उठाए, इसके लिए सरकार लंबे समय तक अपना अभियान जारी रखेगी।