Friday, June 22, 2012

लकवे के मिले साठ हजार से अधिक मामले


देश भर में 15 साल से कम उम्र के बच्चों में लकवे के आधे से अधिक मामले सिर्फ उत्तर प्रदेश और बिहार में मिले हैं। बीते साल देश भर के बच्चों में कुल 60,593 ऐसे मामले दर्ज किए गए। इन बच्चों में 37 प्रतिशत सिर्फ उत्तर प्रदेश के रहे, जबकि ऐसे 29 प्रतिशत बच्चे बिहार के थे। इन राज्यों में दिमागी बुखार इसका एक बड़ा कारण बनकर उभरा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की साझेदारी में चल रहे केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की योजना के तहत यह आंकड़े सामने आए हैं। इनके मुताबिक बच्चों में कुछ अंगों को गंभीर रूप से शिथिल कर देने वाले लकवे के ये मामले इन दो राज्यों को लेकर विशेष रूप से चिंता पैदा करते हैं। पिछले वर्ष उत्तर प्रदेश में 22,282 और बिहार में 17,589 मामले सामने आए थे। इस साल भी यही क्रम जारी है। 16 जून तक मिले आंकड़ों के मुताबिक देश भर में 22,831 ऐसे मामले सामने आ चुके हैं। इनमें उत्तर प्रदेश में 7,694 और बिहार में 6,387 मामले सामने आए हैं। अंतरराष्ट्रीय मानकों के मुताबिक 15 वर्ष से कम की प्रति लाख आबादी पर एक से दो मामले होने चाहिए। उत्तर प्रदेश और बिहार में ये आंकड़े इसलिए भी ज्यादा परेशान करने वाले हैं क्योंकि वहां सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा की हालत खराब है। लकवे से प्रभावित बच्चों में बहुत कम ही होंगे, जिन्हें सही इलाज मिल सकेगा। इन दोनों राज्यों को छोड़कर देश के किसी भी दूसरे राज्य में पिछले एक वर्ष के दौरान तीन हजार से ज्यादा ऐसे मामले सामने नहीं आए। इस मामले में तीसरे स्थान पर मध्य प्रदेश है, लेकिन यहां भी सिर्फ 2,806 मामले दर्ज किए गए हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारी कहते हैं कि यह संख्या इतनी ज्यादा होने की एक बड़ी वजह ऐसे आंकड़ों को लेकर पिछले कुछ वर्षो के दौरान आइ मुस्तैदी भी है। उनके मुताबिक पोलियो उन्मूलन अभियान के तहत ऐसे मामलों की सूचना को लेकर गंभीरता से काम किया गया है।

Friday, June 1, 2012

जानलेवा तंबाकू


तंबाकू जहर है। यह हर रूप में नुकसान पहुंचाता है। अकसर तंबाकू सेवन की शुरुआत कॉलेज में दोस्तों के साथ होती है, जो बाद में ऑफिस और घर में साथ नहीं छोड़ती। आंकड़ों से पता चलता है कि हर वर्ष भारत में धूम्रपान की वजह से लगभग नौ लाख लोगों की मौत होती है। इनमें कैंसर से मरने वालों की संख्या लगभग सात लाख होती है। इसकी वजह यह है कि तंबाकू में 3000 से अधिक प्रकार के हानिकारक रसायन पाये जाते हैं जो सीधे शरीर के हर हिस्से को नुकसान पहुंचाते हैं। जैसे अमोनिया, कार्बन मोनोऑक्साइड, मेथेनॉल, निकोटिन, कोलतार, रेडियोएक्टिव तत्व आदि। ग्लोबल यूथ टोबैकोसव्रे के अनुसार, अपने देश में 65 प्रतिशत पुरुष और 20 प्रतिशत से अधिक महिलाएं किसी ना किसी रूप में तंबाकू का सेवन कर रही हैं। कैंसर के एक चौथाई मामले तंबाकू के कारण होते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, एक सिगरेट पीने से आयु तकरीबन साढ़े पांच मिनट कम हो जाती है।
तंबाकू से होने वाली बीमारियां
तंबाकू चबाने से मुंह का कैंसर, खाने की नली, सांस की नली और जननांग का कैंसर होता है। धूम्रपान करने से मुंह का कैंसर, खाने और सां स की नली का कैंसर, फेफड़े, लैरिंक्स, पेट, पित्त की थैली और पेशाब की थैली का कैंसर होता है। हृदय रोग जैसे ब्लड प्रेशर बढ़ना और हार्ट अटैक। सांस का रोग जैसे क्रॉनिक ओबस्ट्रक्टिव पॉलमोनरी डिजीज। यही नहीं, स्मोकिंग से टीबी होने का खतरा भी चार गुना बढ़ जाता है। गर्भपात, बच्चों में विकृतियां और महिलाओं में अनियंत्रित माहवारी। धूम्रपान करने वाले लोगों में सेक्स संबंधी समस्या भी होती है। अकसर देखा गया है कि लोग तनाव को दूर करने के लिए तंबाकू का सेवन करते हैं लेकिन हकीकत इससे अलग है। तंबाकू का सेवन करने वाला व्यक्ति तनाव से ग्रस्त होता है।
भारत के आंकड़े
तंबाकू के सेवन से लगभग नौ लाख लोगों की मौत होती है। 20 प्रतिशत पुरुष और 5 प्रतिशत महिलाओं की मौत 30 से 69 वर्ष के बीच की अवस्था में तंबाकू की वजह से होती है। 62 प्रतिशत महिलाएं जो तंबाकू का सेवन करती हैं, वे 69 वर्ष के पहले ही मर जाती हैं। एक तिहाई से अधिक लोग बीड़ी का सेवन करते हैं। बीड़ी का एक चौथाई हिस्सा एक पूरी सिगरेट के बराबर नुकसान करता है। अगर कोई व्यक्ति रोजाना एक सिगरेट पीता है और वह दस साल तक जिंदा रहता है तो एक बीड़ी रोज पीने से वह छह साल में ही मर जाएगा। बीड़ी और सिगरेट पीने वाले व्यक्ति की मृत्युदर 50 प्रतिशत बढ़ जाती है।
सिगरेट में मिलने वाले हानिकारक रसायन
एक्टोन- यह एक प्रकार का सॉल्वेंट है जिसका प्रयोग केमिकल फैक्ट्रियों में किया जाता है। मेथेनॉल- मेथेनॉल एक प्रकार का पेट्रोलियम पदार्थ है। इसका सबसे अधिक प्रयोग अंतरिक्ष में जाने वाले रॉकेट में ईधन के रूप में किया जाता है। अमोनिक एसिड- इसका प्रयोग कपड़ा धोने वाले पाउडर और साबुन में किया जाता है। कैडमियम- इसका प्रयोग विद्युत वाली बैटरियों में किया जाता है जो तेजाब के बीच में लगाया जाता है। डीडीटी- यह एक प्रकार की कीटनाशक दवा है। इसका नुकसान इतना ज्यादा है कि सरकार ने इसको कीटनाशक के रूप में भी इस्तेमाल करने पर रोक लगा दी है। विनॉ यल क्लोराइड- इसका प्रयोग प्लास्टिक कंपनियां प्लास्टिक बनाने के मैटीरियल के रूप में करती हैं। आर्सेनिक- आर्सेनिक जानलेवा रसायन है। शरीर में जाने के बाद गुर्दे और फेफड़े बुरी तरह प्रभावित होते हैं। टॉलविन- यह एक प्रकार का औद्योगिक रसायन है।
तंबाकू से संबं धित विश्व के आंकड़े
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार वर्ष 2006 में हर वर्ष तंबाकू सेवन से मरने वाले लोगों की संख्या लगभग 54 लाख थी। जिस तरह धूम्रपान तेजी से बढ़ रहा है, यह आंकड़ा 2030 तक बढ़कर एक करोड़ हो जाएगा। विकासशील देशों में वर्ष 2030 तक धूम्रपान से मरने वाले लोगों की संख्या लगभग 80 लाख प्रति वर्ष हो जाएगी। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार 20वीं शताब्दी में तंबाकू की वजह से एक अरब लोगों की असमय मौत हो चुकी है। आंकड़ों से पता चलता है कि अमेरिका जैसे विकसित देशों में धूम्रपान करने वाले लोगों की संख्या घट रही है जबकि विकासशील देशों में इसकी संख्या तेजी से बढ़ रही है।