Friday, September 30, 2011

दिल की बीमारियों को रोकना संभव


तंबाकू, असंयमित खानपान और शारीरिक श्रम का अभाव कॉर्डियोवस्कुलर बीमारियों का मुख्य कारण हैं। ज्यादातर लोग यह जानने के बाद भी सतर्क नहीं होते और मौत के मुंह में चले जाते हैं। जबकि ऐसे अधिकतर मामलों को थोड़ी सावधानी से रोका जा सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, 2008 में कॉर्डियो वस्कुलर बीमारियों से 1.73 करोड़ लोगों की मौत हुई। इनमें से 80 फीसदी से अधिक लोग निम्न एवं मध्यम आय वाले देशों के थे। अगर समय रहते सचेत न हुए तो वर्ष 2030 तक कार्डियोवस्कुलर बीमारियों से मरने वालों की संख्या 2.36 करोड़ तक पहुंच सकती है। हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ सचित मोतीरमानी ने बताया कि समय रहते सावधानी बरतना जरूरी है। दिल की सेहत ठीक तो जीवन ठीक है। दैनिक दिनचर्या के दौरान कई ऐसे संकेत मिल जाते हैं जो बता सकते हैं कि आने वाले समय में कोई समस्या हो सकती है। समय रहते इससे बचाव के उपाय करना चाहिए। हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ उपेंद्र कौल कहते हैं कि सबसे बड़ी बात यह है कि दिल के दौरे और आघात के 80 फीसदी मामले रोके जा सकते हैं। हर दिन कम से कम आधे घंटे का व्यायाम हृदयाघात को रोकने के लिए जरूरी है। तंबाकू से जितना हो सके, बचना चाहिए। असंयमित खान-पान भी दिल की सेहत के लिए खतरनाक होता है। बचाव के लिए खाने में हरी सब्जियों और फलों का होना बहुत जरूरी है। नमक का सेवन भी कम करना चाहिए। हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ एसके सिंह कहते हैं कि तंबाकू से बचें। सिगरेट, सिगार, पाइप, बीड़ी, तंबाकू चबाना सभी खतरनाक है। अब 26 और बीमारियों के लिए भी कैंसर जैसा कार्यक्रम नई दिल्ली : अस्थमा, अंधेपन, बहरेपन और बुढ़ापे से जुड़ी दूसरी बीमारियों को लेकर भी स्वास्थ्य मंत्रालय सक्रिय हो गया है। अब इन 26 बीमारियों से लड़ने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर विशेष प्रयास शुरू होंगे। इस समय चल रहे कैंसर, मधुमेह, हृदय रोग और दिल के दौरे से बचाव और नियंत्रण के राष्ट्रीय कार्यक्रम में इन बीमारियों को भी शामिल किया जाएगा। हाल ही में कैंसर, मधुमेह, हृदय रोग और दिल के दौरे जैसी बेहद गंभीर बीमारियों से बचाव और उपचार के लिए एक विशेष कार्यक्रम शुरू किया गया है। लेकिन गैर संचारी रोगों के इस कार्यक्रम में अब अस्थमा, अंधापन, बहरापन, आघात, घुटने और जोड़ों की समस्या जैसी बीमारियों के अलावा वृद्धावस्था से जुड़ी बीमारियां, मानसिक स्वास्थ्य, दुर्घटना और जलने के मामलों आदि को भी शामिल किया जाएगा। स्वास्थ्य मंत्रालय की योजना है कि 12वीं पंचवर्षीय योजना के तहत हर वर्ष सौ जिलों को इस कार्यक्रम में शामिल किया जाए। ताकि अगले छह वर्ष के दौरान देश के सभी जिले शामिल हो सकें। शुरुआत सबसे ज्यादा पिछड़े जिलों से की जाएगी। बड़े शहरों को सबसे बाद में शामिल किया जाएगा।

No comments:

Post a Comment