बीआरडी मेडिकल कालेज में इंसेफेलाइटिस मरीजों की बाढ़ और लगातार हो रही मौतों ने सरकारी जेई टीकाकरण अभियान की कलई खोल कर रख दी है। मेडिकल कालेज के नेहरू अस्पताल में इस वर्ष भर्ती हुए 2545 में से 2537 मरीजों के घरवालों ने टीके लगाए जाने से साफ तौर पर इंकार किया है, जबकि शासन 67,90820 बच्चों के लक्ष्य के मुकाबले 99.03 फीसदी टीकाकरण का दावा कर चुका है। इस साल अक्टूबर महीने में गोरखपुर आए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद भी टीकाकरण पर सवाल उठा चुके हैं। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा था कि वर्ष 2006 में गोरखपुर-बस्ती मंडलों में भारत सरकार के खर्च से टीकाकरण कराया गया था। वर्ष 2009 तक प्रदेश के 34 जिलों में टीकाकरण कराया गया। केंद्र ने टीके तो दिए, लेकिन राज्य सरकार की लापरवाही से जरूरतमंदों को टीके नहीं लगे। वर्ष 2006 में कराए गए टीकाकरण में तो आधे लोगों को ही टीके लगे। इसलिए 2010 में टीकाकरण कराना पड़ा। बीते दो दिसंबर तक इंसेफेलाइटिस के 3182 मरीज भर्ती किए गए, जिनमें 2545 पंद्रह वर्ष से कम उम्र के थे। इन मरीजों के परिवारीजन से जब इंसेफेलाइटिस का टीका लगाने के बारे में पूछा गया तो 2537 का जवाब नहीं में आया। सिर्फ आठ लोगों ने टीके लगाने की बात स्वीकार की। पिछले साल नवंबर महीने में जापानी इंसेफेलाइटिस से बचाव के लिए शुरू टीकाकरण अभियान में एक से पंद्रह वर्ष आयु तक के बच्चों को टीके लगाए गए थे। जब जापानी इंसेफेलाइटिस रोधी अभियान के तहत पिछले साल नवंबर माह में गोरखपुर-बस्ती मंडलों के जिलों में जोर शोर से टीकाकरण अभियान चलाया गया था और इसमें करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाए गए। कर्मचारियों की भारी भरकम फौज दिन-रात लगी रही थी। टीकाकरण अभियान से पूर्व लाखों खर्च करके जागरूकता अभियान चलाने का भी दावा किया गया।
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