यूपी एम्स हर साल लगभग तीन से पांच हजार लोगों को सीधे मौत के मुंह से निकाल सकेगा। इसके अलावा कम से कम एक लाख मरीज ऐसे होंगे, जो सही समय पर इलाज मुहैया होने से बिस्तर पकड़े रहने को मजबूर नहीं होंगे। इसी तरह कुल तीन लाख मरीजों को यह महंगे प्राइवेट इलाज की मार से बचा सकेगा। नए एम्स में प्रस्तावित सुविधाओं, विशेषज्ञताओं और उपकरणों और उत्तर प्रदेश में बीमारियों की मौजूदगी को देखते हुए यह आकलन है पटना में स्थापित हो रहे एम्स के निदेशक जीके सिंह का। व्यवहारिक परिस्थितियों को देख माना जा रहा है कि लगभग तीन लाख मरीजों का सालाना यहां इलाज हो सकेगा। इनमें से औसतन 30 हजार मरीज भर्ती किए जा सकेंगे। उपलब्ध सुविधाओं के मुताबिक इलाज के बावजूद दाखिल किए जाने वाले मरीजों में मृत्यु दर लगभग 10 से 15 फीसदी हो सकती है। जबकि ऐसी चिकित्सा सुविधा नहीं मिलने पर यह मृत्यु दर 20 से 25 फीसदी होने का खतरा है। इस तरह इनमें से 10 से 15 फीसदी जिंदगियां सीधे बचाई जा सकेंगी। टूट रहा आठ सौ करोड़ का गरीबों का सपना 42 स्पेशलिटी और सुपर स्पेशलिटी विभागों वाला यह अस्पताल इस इलाके में अपनी तरह का अकेला अस्पताल होगा, जहां लगभग सभी बीमारियों का इलाज हो सकेगा। 823 करोड़ की लागत से बनने वाले एम्स के तहत मरीजों को भर्ती करने के लिए 960 बिस्तरों की क्षमता होगी। इसमें 500 बिस्तर सामान्य बीमारियों के मरीजों के लिए होंगे। 300 बिस्तर स्पेशलिटी और सुपर स्पेशलिटी विभाग में होंगे। सौ बिस्तर अति सघन चिकित्सा (आइसीयू) और किसी हादसे आदि का शिकार हुए मरीजों के लिए होंगे। 30 बिस्तर फिजिकल मेडिसिन और 30 आयुर्वेदिक आदि पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के इलाज के लिए होंगे।
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