बच्चों में टीबी की पहचान होगी आसान
ठ्ठ मुकेश केजरीवाल, चेन्नई टीबी
के शिकार बच्चों को अब इसकी पहचान के अभाव में इलाज से वंचित नहीं रहना
पड़ेगा। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आइसीएमआर) ने बच्चों में जीन एक्सपर्ट
तकनीक की उपयोगिता का अध्ययन शुरू कर दिया है। यह तकनीक कामयाब रही
तो बलगम की सूक्ष्मदर्शी जांच पर पिछले सौ सालों से चली आ रही निर्भरता दूर
हो सकेगी। आइसीएमआर
के राष्ट्रीय क्षयरोग शोध संस्थान ने इसकी उपयोगिता आंकने के लिए 15 साल
से कम उम्र के टीबी के दो हजार मरीजों के बीच अध्ययन शुरू कर दिया है।
बाल क्षयरोग की शीर्ष विशेषज्ञ और इस संस्थान की निदेशक सौम्या स्वामीनाथन
ने बताया कि वर्ष 2014 तक
अध्ययन पूरा हो जाएगा। ऐसे मरीजों के नमूनों की न सिर्फ
जीन एक्सपर्ट तकनीक से जांच की जाएगी, बल्कि कल्चर जांच भी
की जाएगी। चेन्नई का बाल अस्पताल और स्टैनली अस्पताल के अलावा क्रिश्चियन
मेडिकल कॉलेज, वेल्लूर
भी इस अध्ययन में शामिल है। जीन एक्सपर्ट को विश्व स्वास्थ्य
संगठन इसे
मंजूरी दे चुका है। बच्चों के लिए अलग से इसके प्रभाव का
अध्ययन जरूरी है ताकि बच्चों में नए मामलों की भी सीधे इसी तरीके
से जांच शुरू की जा सके। अभी बच्चों में नए मामलों की जांच के लिए बलगम
की सूक्ष्मदर्शी जांच, फेफड़े
के एक्सरे या ट्यूबरक्यूलिन स्किन टेस्ट का इस्तेमाल हो रहा
है। खून के नमूने से होने वाली जांच तो इतनी भ्रामक है कि
सरकार ने इस पर रोक लगा दी है। नई तकनीक से यह दो घंटे में मुमकिन है। पहली
बार में ही दवा प्रतिरोध का भी पता चल जाता है। संशोधित राष्ट्रीय क्षयरोग
नियंत्रण कार्यक्रम में पायलट योजना के तहत 28 जगहों
पर नई तकनीक से
जांच करने वाली मशीन का इस्तेमाल हो रहा है। इन जगहों पर वयस्क मरीज ज्यादा
आते हैं। मंत्रालय के सूत्र बताते हैं कि जल्द ही सभी जिलों और सरकारी
मेडिकल कालेजों में लगाने के लिए दस लाख रुपये की कीमत वाली ऐसी 950 मशीनें
खरीदी जा सकती हैं।
1.
Dainik Jagran National Edition 3-12-2012 Page-3 (LokLF;)