Saturday, December 1, 2012

दिल्ली में हर साल 5000 एचआइवी मरीज


ठ्ठराहुल आनंद, नई दिल्ली 195 एनजीओ का परिश्रम और 10 करोड़ के बजट के बावजूद राजधानी में औसतन हर साल 5 हजार एचआइवी के नए मरीज बढ़ रहे हैं, जो यह साबित करता है कि कहीं न कहीं सरकारी सिस्टम में कोई बड़ी गड़बड़ी है। इतना जरूर है कि सरकार और एनजीओ एचआइवी के मामले को लेकर हल्ला मचाने में कभी पीछे नहीं रहे हैं, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि इसे नियंत्रित करने में पूरी तरह नाकाम रहे हैं। वर्ष 2007 में दिल्ली में एचआइवी के मरीजों की संख्या 13,494 थी जो वर्ष 2011 तक बढ़ कर 35,036 तक पहुंच गई है। जानकारों का कहना है कि एचआइवी मरीजों की संख्या और अधिक हो सकती है, क्योंकि बड़ी संख्या में ऐसे लोग पंजीकरण नहीं कराते। दिल्ली राज्य एड्स कंट्रोल सोसायटी के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2011 में दिल्ली में एचआइवी के 5,502 नए मरीजों का पंजीकरण किया गया है। इनमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी हैं। एक आरटीआइ से हुए इस खुलासे से दिल्ली सरकार का स्वास्थ्य विभाग भी हैरत में है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. एके वालिया ने एचआइवी के बढ़ते मरीजों की वजह और इस पर किए जा रहे कार्यो की समीक्षा की बात कही है। उन्होंने भरोसा दिलाया है कि इस पर नियंत्रण के लिए सभी जरूरी प्रयास किए जाएंगे। दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. हरीश गुप्ता कहते हैं कि इसे नियंत्रित करने में कहीं न कहीं सरकार का प्रयास उस स्तर का नहीं रहा है, जिससे इस पर पूरी तरह से नियंत्रण पाया जा सके। बचाव ही इस बीमारी का एकमात्र तरीका है और डॉक्टरों के साथ-साथ सरकार को भी इस पर ही फोकस करना चाहिए। खास कर, जागरूकता कार्यक्रम में युवाओं को शामिल करने की जरूरत है, जो इस बात को दूसरे तक भी पहुंचाने में मददगार होंगे। आरटीआइ एक्टिविस्ट राजहंस बंसल ने कहा कि आरटीआई के इस खुलासे से साफ होता है कि भले ही हमारे यहां पैसे की कमी नहीं है लेकिन इच्छाशक्ति की कमी की वजह से एचआइवी एड्स मरीजों की संख्या को नियंत्रित करने में सरकार विफल हो रही है।
1.     Dainik Jagran National Edition 1-12-2012 Page -2 LokLF;)

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