Saturday, May 19, 2012

भारत में बिकती हैं विकसित देशों में प्रतिबंधित दवाएं

दवा कंपनियों, दवा नियंत्रक संगठन तथा मेडिकल विशेषज्ञों के बीच नई दवाओं को मंजूरी के लिए साठगांठकी तरफ इशारा करते हुए एक संसदीय समिति ने कहा है कि विकसित देशों में प्रतिबंधित दवाएं भारत में बेची जाती हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण पर संसद की स्थायी समिति ने नई दवाओं को मंजूरी में गंभीर खामियों और अनियमितताओं की तरफ भी इशारा किया है। समिति ने कहा है कि 33 ऐसी दवाओं को भारतीय मरीजों पर क्लिनिकल परीक्षण के बिना मंजूरी दे दी गई। समिति ने केंद्रीय दवा मानक नियंत्रक संगठन (सीडीएससीओ) द्वारा मंजूर नई दवाओं के भारतीय मरीजों द्वारा इस्तेमाल पर चिंता जताते हुए कहा है कि इस मामले की समीक्षा की जानी चाहिए जिससे मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके और इस क्षेत्र में पारदर्शिता, ईमानदारी और उत्तरदायित्व आए। समिति ने कहा है कि 42 दवाओं की छानबीन में यह तथ्य सामने आया है कि इन्हें नियामक प्रक्रि याओं और नियमों का उल्लंघन करते हुए अनुमति दी गई। तीन विवादास्पद दवाओं पीफ्लोक्सिन, लोमफ्लोक्सिन तथा स्पारफ्लोक्सिन की फाइलें गायब थीं। इन दवाओं को अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, आस्ट्रेलिया सहित कई अन्य देशों में या तो बेचा ही नहीं जाता है, या फिर वापस ले लिया गया है। समिति ने उन दवा उद्योगों और मेडिकल विशेषज्ञों के बीच साठगांठ की ओर इशारा किया है जो कि व्यक्तिगत सोचके आधार पर असुरक्षितदवाओं के उपयोग पर जोर देते हैं। समिति ने दवा क्षेत्र में चल रही साठगांठ पर गहरी चिंता और अप्रसन्नता व्यक्त की है। समिति ने कहा है कि मंत्रालय को इस बात का ध्यान रखना चाहिये कि केन्द्रीय दवा मानक नियंतण्रसंगठन के कर्मचारी नई दवाओं को मंजूरी देने में किसी तरह की अनियमितताओं में लिप्त नहीं हों।

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