प्रभावित होता है। एक अध्ययन के मुताबिक अनियंत्रित
उच्च रक्तचाप दिमाग की संरचना और उसकी क्रिया विधि को नुकसान पहुंचाता है। यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के शोधकर्ताओं ने
पाया है कि मध्यम आयु वर्ग के जिन लोगों को तनाव न लेने की सलाह दी जाती है, उनमें उच्च रक्तचाप से मस्तिष्क के प्रभावित
होने की आशंका काफी अधिक होती है। शोधकर्ताओं के मुताबिक यह अपनी तरह का पहला
अध्ययन है जिसमें उच्च रक्तचाप से मस्तिष्क की संरचना को नुकसान पहुंचने की बात
कही गई है। वरिष्ठ शोधकर्ता चार्ल्स डीकार्ली ने बताया कि इस अध्ययन से स्पष्ट
होता है कि व्यक्ति को कम उम्र से ही अपने रक्तचाप पर नियंत्रण रखना चाहिए। उच्च
रक्तचाप की अवस्था में मस्तिष्क की कोशिकाएं भी पूरी तरह विकसित नहीं हो पातीं। यह
अध्ययन विज्ञान पत्रिका द लांसेट न्यूरोलॉजी में प्रकाशित किया गया है। अब तक माना
जाता था कि उच्च रक्तचाप की परेशानी होने पर हृदय रोग होने की आशंका बढ़ जाती है।
अमूमन देखा भी गया है कि जिन लोगों को हाई ब्लडप्रेशर की परेशानी होती है वह दिल
की बीमारी से भी पीडि़त हो जाते हैं। हालांकि अब इस शोध से इस बात की पुष्टि हो गई
है कि हाई बीपी के मरीज को मस्तिष्क संबंधी रोग होने की भी प्रबल आशंका होती है।
अब धड़केगा कृत्रिम दिल जबलपुर : दिल यदि साथ छोड़ दे तो उसकी जगह लेने कृत्रिम
दिल तैयार है। हृदय में पूरी तरह खराबी
आने पर इसका ट्रांसप्लांट किया जा सकेगा। यूरोप में सात मरीजों पर इसका ट्रायल
किया जा रहा है। एस्कार्ट हार्ट इंस्टीट्यूट के कार्डियेक विभाग के डायरेक्टर डॉ.युगल किशोर मिश्रा ने बताया
कि पिछले सप्ताह बार्सिलोना में हृदय रोग की कान्फ्रेंस में कृत्रिम हृदय प्रत्यारोपण के संबंध में
चर्चा की गई। इस विधि में पूर्ण रूप से हृदय का प्रत्यारोपण किया जाता है। इसके
अलावा हृदय खराब होने पर एक अन्य तकनीक पर भी कार्य चल रहा है। इसमें हृदय के खराब
होने पर लेफ्ट हार्ट एक्सिस डिवाइज लगाया जाता है। जर्मनी में इस तकनीक का काफी
उपयोग हो रहा है। इस तकनीक में मरीज पर 50 लाख रुपये खर्च होते हैं। चिकित्सकों का कहना
है कि इस इलाज के खर्च को कम करने के लिए एक नए किस्म के वैक्यूम की खोज में
वैज्ञानिक लगे हुए हैं। डॉ.युगल किशोर मिश्रा को डॉक्टर ऑफ साइंस की मानद उपाधि से सम्मानित किया है।
Dainik Jagran National Edition 4-11-2012
Health page -14
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