Friday, November 30, 2012

देश में मधुमेह न बन जाए महामारी

देश में मधुमेह न बन जाए महामारी
ठ्ठ मुकेश केजरीवाल, नई दिल्ली देश में पहली बार एक करोड़ से ज्यादा लोगों की डायबिटीज जांच पूरी हो चुकी है। इसके नतीजों को देखते हुए तुरंत सावधान हो जाने की जरूरत है। 30 साल से ज्यादा उम्र के 1.06 करोड़ लोगों की इस जांच में 7.59 लाख को मधुमेह का शिकार पाया गया है। यानी इस उम्र में 7.15 फीसद लोगों को जीवन भर इस समस्या से जूझने को तैयार रहना होगा। हालांकि असम, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड और हरियाणा में इस उम्र के पांच फीसदी से कम लोगों को यह समस्या पाई गई है। उत्तर प्रदेश में यह 5.91 फीसद जरूर है, मगर फिर भी राष्ट्रीय औसत से काफी कम है। जबकि दक्षिण के तमिलनाडु में 11.76 फीसद, कर्नाटक में 10.23 फीसद और केरल में 9.38 फीसद के साथ और ज्यादा डरावने स्तर पर है। हालांकि उड़ीसा में 9.05 फीसद और पश्चिम बंगाल में 9.84 फीसद लोगों के प्रभावित होने की वजह से यह भी साफ है कि राज्य की आर्थिक समृद्धि का इससे संबंध नहीं है। भारत में डायबिटीज के खतरे को लेकर आशंका तो पहले से ही जताई जाती रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अंदाजे के मुताबिक वर्ष 2000 में भारत में जहां 3.2 करोड़ डायबिटीज के रोगी थे, वहीं वर्ष 2030 तक यह तादाद बढ़ कर आठ करोड़ तक पहुंच जाएगी। मगर पहली बार कैंसर, डायबिटीज, हृदय रोग और लकवा के बचाव और नियंत्रण के राष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत इतने बड़े पैमाने पर जांच हुई है। स्वास्थ्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक जुलाई 2010 में शुरू किए गए इस कार्यक्रम के तहत देश भर की 30 से ज्यादा उम्र की पूरी आबादी की डायबिटीज जांच की जानी है। फिलहाल इसमें सौ जिलों को शामिल किया गया है। इसके लिए 21,500 ग्लूकोमीटर, 4.3 करोड़ ग्लूकोस्ट्रीप और 4.95 करोड़ लैसेट्स भेजे गए हैं। ग्यूलोकमीटर की मदद से यह जांच करने के लिए एएनएम (नर्सो) को प्रशिक्षित किया गया है। साथ ही जिन लोगों को डायबिटीज पाया जाता है, उन्हें अस्पताल जाने की सलाह भी दी जा रही है। अधिकारी के मुताबिक स्वास्थ्य उप केंद्रो में होने वाली इस जांच के सारे रिकार्ड जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर रखे जा रहे हैं। मधुमेह के कारण लोगों के पैर खराब हो जाते हैं और रोग प्रतिरोधक क्षमता भी घटती है। ये एक जानलेवा रोग भी है।
Dainik Jagran National Edition 30-11-2012 Page-14 LokLF;
देश में मधुमेह न बन जाए महामारी
ठ्ठ मुकेश केजरीवाल, नई दिल्ली देश में पहली बार एक करोड़ से ज्यादा लोगों की डायबिटीज जांच पूरी हो चुकी है। इसके नतीजों को देखते हुए तुरंत सावधान हो जाने की जरूरत है। 30 साल से ज्यादा उम्र के 1.06 करोड़ लोगों की इस जांच में 7.59 लाख को मधुमेह का शिकार पाया गया है। यानी इस उम्र में 7.15 फीसद लोगों को जीवन भर इस समस्या से जूझने को तैयार रहना होगा। हालांकि असम, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड और हरियाणा में इस उम्र के पांच फीसदी से कम लोगों को यह समस्या पाई गई है। उत्तर प्रदेश में यह 5.91 फीसद जरूर है, मगर फिर भी राष्ट्रीय औसत से काफी कम है। जबकि दक्षिण के तमिलनाडु में 11.76 फीसद, कर्नाटक में 10.23 फीसद और केरल में 9.38 फीसद के साथ और ज्यादा डरावने स्तर पर है। हालांकि उड़ीसा में 9.05 फीसद और पश्चिम बंगाल में 9.84 फीसद लोगों के प्रभावित होने की वजह से यह भी साफ है कि राज्य की आर्थिक समृद्धि का इससे संबंध नहीं है। भारत में डायबिटीज के खतरे को लेकर आशंका तो पहले से ही जताई जाती रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अंदाजे के मुताबिक वर्ष 2000 में भारत में जहां 3.2 करोड़ डायबिटीज के रोगी थे, वहीं वर्ष 2030 तक यह तादाद बढ़ कर आठ करोड़ तक पहुंच जाएगी। मगर पहली बार कैंसर, डायबिटीज, हृदय रोग और लकवा के बचाव और नियंत्रण के राष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत इतने बड़े पैमाने पर जांच हुई है। स्वास्थ्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक जुलाई 2010 में शुरू किए गए इस कार्यक्रम के तहत देश भर की 30 से ज्यादा उम्र की पूरी आबादी की डायबिटीज जांच की जानी है। फिलहाल इसमें सौ जिलों को शामिल किया गया है। इसके लिए 21,500 ग्लूकोमीटर, 4.3 करोड़ ग्लूकोस्ट्रीप और 4.95 करोड़ लैसेट्स भेजे गए हैं। ग्यूलोकमीटर की मदद से यह जांच करने के लिए एएनएम (नर्सो) को प्रशिक्षित किया गया है। साथ ही जिन लोगों को डायबिटीज पाया जाता है, उन्हें अस्पताल जाने की सलाह भी दी जा रही है। अधिकारी के मुताबिक स्वास्थ्य उप केंद्रो में होने वाली इस जांच के सारे रिकार्ड जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर रखे जा रहे हैं। मधुमेह के कारण लोगों के पैर खराब हो जाते हैं और रोग प्रतिरोधक क्षमता भी घटती है। ये एक जानलेवा रोग भी है।
Dainik Jagran National Edition 30-11-2012 Page-14 LokLF;

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