नई दिल्ली गरीबों का मुफ्त में इलाज करने के मामले में कोताही बरतने वाले निजी अस्पतालों से दिल्ली सरकार ने अब हर्जाना वसूलने का फैसला किया है। दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने ऐसे 8 अस्पतालों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है जो पूर्व में हाईकोर्ट द्वारा दिए गए आदेश का पालन नहीं कर रहे थे। हाईकोर्ट के इस आदेश के खिलाफ कुछ अस्पतालों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे रखी थी जिसकी वजह से विभाग कार्रवाई नहीं कर पा रही थी। लेकिन अब जब सुप्रीम कोर्ट की तरफ से भी हाईकोर्ट के आदेश पर मोहर लग गई है तब विभाग ने अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई करने के फैसला किया है। दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव ने हाईकोर्ट को यह सूचना दी है। सूचना में यह कहा गया है कि लगभग 25 निजी अस्पतालों ऐसे हैं जो कोर्ट के फैसले के बाद भी इलाज नहीं कर रही थी। विभाग निजी अस्पतालों से वसूले गए जुर्माने की राशि दिल्ली सरकार के अस्पतालों के हालात सुधारने में खर्च करेगी। इस मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने एक हलफनामा दायर कर बताया है कि 22 मार्च 2007 को हाई कोर्ट द्वारा मुफ्त इलाज करने के संबंध में दिए गए आदेश का पालन करवाने के लिए विभाग कदम उठा रहा है। जिसमें देखा जा रहा है कि अस्पताल निश्चित प्रतिशत में ओपीडी व आइपीडी में गरीबों का इलाज कर रहे है या नहीं। सरकार ने 43 ऐसे अस्पताल चिन्हित किए हैं जिन्होंने सरकार से रियायती दर पर जमीन ली थी, जिनमें तीन अस्पतालों के बारे में हाल में पता चला है। फिलहाल 43 में से 40 ऐसे अस्पताल हैं जहां गरीबों का मुफ्त में इलाज किया जा रहा है। इन सभी अस्पतालों में गरीबी कोटे के तहत इलाज कराने वालों के लिए 636 बेड आरक्षित हैं। अब तक निजी अस्पताल में जहां इनडोर 1,05,499 मरीजों को भर्ती किया गया है वहीं 31, 90,798 मरीजों को ओपीडी में मुफ्त में यह सुविधा प्राप्त कर चुके हैं।
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