Wednesday, June 29, 2011

60 हजार में बदलेंगे घुटने


शहर के सरकारी मेडिकल कॉलेज में, अत्याधुनिक उपकरणों और सुविधाओं से सुसज्जित स्टेट ऑफ दि आर्ट ऑपरेशन थिएटर में अब घुटने का प्रत्यारोपण (नी रिप्लेसमेंट) सिर्फ 60 हजार रुपये में संभव है, जबकि इसी ऑपरेशन के लिए मरीज को बड़े निजी अस्पताल में साढ़े तीन लाख रुपये खर्च करने पड़ते हैं। कानपुर के सरकारी गणेश शंकर विद्यार्थी मेडिकल कॉलेज (जीएसवीएम) में कुछ दिन पहले ही अत्याधुनिक उपकरणों और सुविधाओं से सुसज्जित स्टेट ऑफ दि आर्ट ऑपरेशन थिएटर की शुरुआत हुई है। अभी तक इस ऑपरेशन थिएटर में किसी भी रोगी के ऑपरेशन के बाद उसे किसी भी प्रकार के संक्रमण की कोई शिकायत नहीं आई है। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य और हड्डी रोग विभाग के प्रमुख प्रो आनंद स्वरूप ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में घुटना प्रत्यारोपण की सुविधा केवल 60 हजार रुपये में उपलब्ध है। इसमें से 45 हजार रुपये रोगी के घुटने में लगाए जाने वाले, स्वदेश निर्मित इम्प्लान्ट के लिए तथा 15 हजार रुपये अन्य खर्च के लिए प्रयुक्त होते हैं। रोगी को दवाएं और भर्ती रहने के दौरान खाना-पीना अस्पताल से मुफ्त में दिया जाता है। घुटना प्रत्यारोपण कराने वाले रोगी को तीन दिन में उसके पैरों पर चलाने की कोशिश की जाती है तथा एक हफ्ते के अंदर घर जाने की इजाजत दे दी जाती है। निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम में एक घुटने के प्रत्यारोपण में दो से ढाई लाख रुपये का खर्च आता है। कॉरपोरेट अस्पताल में इसी ऑपरेशन के लिए खर्च तीन से साढ़े तीन लाख रुपये तक होता है। प्रो स्वरूप ने बताया कि निजी अस्पतालों में घुटना प्रत्यारोपण करने वाले सर्जन की फीस ही 70 हजार से एक लाख रुपये के बीच होती है। ऑपरेशन थिएटर, नर्सिंग और एनेस्थीसिया आदि की फीस भी 70 से 80 हजार रुपये होती है तथा 30 से 40 हजार रुपये की दवाएं लगती हैं। जीएसवीएम सरकारी मेडिकल कॉलेज है इसलिए यहां न तो प्रत्यारोपण ऑपरेशन करने वाले सर्जन की फीस देनी पड़ती है और न ही ऑपरेशन थिएटर आदि का खर्च और दवाइयों के पैसे देने पड़ते हैं.

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