मिड डे मील के बाद अब सूबे के आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को पौष्टिक आहार बांटने की जिम्मेदारी भी माताओं को सौंप दी गई है। माताएं बच्चों को पोषाहार देकर उनकी सेहत सुधारेंगी। फिलहाल यह योजना सहारनपुर, मथुरा, झांसी, कुशीनगर और सीतापुर में लागू की गई है। वैसे बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग ने यह फैसला तो पहले ही कर लिया था, मगर माताओं के हाथ में योजना संचालित करने की चाभी अब दी गई है। गौरतलब है कि इससे पहले प्रदेश सरकार ने सरकारी स्कूलों में मिड डे मील को पकाने और परोसने की जिम्मेदारी भी माताओं को सौंपने का फैसला किया था। विभाग ने विशेष पहल करके हाट कुक्ड फूड योजना के संचालन के लिए मातृ समितियों का पुनर्गठन किया है और उनके बैंक खाते खुलवाकर धनराशि भेजी जा रही है। आंगनबाड़ी केंद्रों पर तीन से छह साल के कुपोषित बच्चों को पौष्टिक आहार देने में पारदर्शिता बरतने के लिए यह प्रयोग किया गया है। विभाग ने पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर चयनित सूबे के पांच जिलों में कक्षा आठ तक पढ़ी लिखी उन माताओं को मातृ समितियों के लिए चुना है, जिनके बच्चे आंगनबाड़ी केंद्रों पर पंजीकृत हैं। योजना की स्थिति यह है कि सहारनपुर जिले की चयनित परियोजना शहर, सढ़ौली, कदीम, गंगोह एवं नकुड़ में संचालित 1005 केंद्रों के सापेक्ष 900 केंद्रों पर मातृ समितियों का गठन कर उनका खाता खुलवा दिया गया है। सहारनपुर ही नहीं मथुरा जिले की चयनित परियोजना मथुरा ग्रामीण, नवझील, बल्देव, चौमुहा, झांसी की मऊ रानीपुर, मोंठ और शहर, कुशीनगर की चयनित परियोजना पड़रौना, शहर, बिशुनपुरा, कप्तानगंज, नेबुआ नौरंगिया तथा सीतापुर की सिधौली, कसमण्डा, बिसवा, पहला एवं रामपुर मथुरा में संचालित सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर मातृ समितियों का पुनर्गठन कर उनके बैंक खाते खोलने के कार्य पूरे कर लिये गये हैं। अभी तक सिर्फ महमूदाबाद परियोजना में भी मातृ समितियों के पुनर्गठन का कार्य पूरा नहीं हो सका है। विभागीय निदेशक देवेन्द्र नाथ वर्मा कहते हैं कि अब तो माताओं की सीधी जवाबदेही है कि वे अपने बच्चों की सेहत सुधारें। इसके लिए योजना के संचालन की उन्हें जिम्मेदारी दी गई है और अब उनको ही अपने बच्चों को हाट कुक्ड योजना का पौष्टिक आहार देना है। हर माह 58:71 करोड़ आहरण की स्वीकृति मिली : बाल विकास परियोजनाओं में संचालित आंगनबाड़ी केन्द्रों पर दिये जाने वाले गरम पूरक पोषाहार की सामग्री खरीदने के लिए सूबे के सभी 897 परियोजनाओं को शासन ने 58 करोड़ 71 लाख 71 हजार 875 रुपये प्रतिमाह की दर से अग्रिम आहरण की स्वीकृति प्रदान की है। यह व्यवस्था अगस्त से आगे हर माह के लिए लागू होगी। जून और जुलाई के व्यय के लिए एक अरब 17 करोड़ 43 लाख 43 हजार 750 रुपये एकमुश्त जारी कर दिये गये हैं।
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