Wednesday, June 29, 2011

कैंसर रोगियों के लिए जागी नई उम्मीद


कैंसर जैसी प्राणघातक बीमारी के इलाज की दिशा में वैज्ञानिकों ने एक ऐसा इंजेक्शन विकसित करने का दावा किया है, जो प्रतिरक्षा तंत्र को अधिक सक्रिय करके कैंसर कोशिकाओं और ट्यूमर को नष्ट कर सकता है। ब्रिटेन में कैंसर के रिसर्च सेंटर और यूनिवर्सिटी ऑफ लीड्स के वैज्ञानिकों ने मिलकर यह इंजेक्शन तैयार किया है। उनका कहना है कि यद्यपि यह इंजेक्शन कैंसर से पूरी तरह निजात नहीं दिला पाएगा। इसको लगाने के बावजूद भी कैंसर की बीमारी बनी रहेगी, लेकिन मरीज इस बीमारी के कारण असमय मौत के मंुह में समाने से बच जाएगा। उन्होंने कहा कि इस इंजेक्शन को लगाने के बाद यह प्राणघातक बीमारी नियंत्रण में आ जाती है और मरीज अपेक्षाकृत अधिक समय तक जी सकता है। वैज्ञानिकों ने अपने प्रयोग के दौरान अमेरिका के मायो क्लीनिक के विशेषज्ञों के साथ मिलकर डीएनए पर आधारित इलाज की यह तकनीक ईजाद की जो बिना किसी दुष्परिणाम के ट्यूमर को नष्ट कर सकती है। अखबार डेली एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, सामान्य तौर पर प्रतिरक्षा तंत्र कैंसर कोशिकाओं के खतरे को नहीं पहचानता और इस कारण उनकी अनदेखी कर देता है। मगर इस इंजेक्शन को लगाने के बाद प्रतिरक्षा तंत्र पहले से अधिक सक्रिय हो जाता है और कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने लगता है। मिर्गी मानसिक बीमारी नहीं नई दिल्ली : मिर्गी मस्तिष्क का एक विकार है जो तंत्रिका कोशिकाओं के असामान्य व्यवहार की वजह से होता है लेकिन यह मानसिक बीमारी या कोई संक्रामक रोग नहीं है। तंत्रिका रोग विशेषज्ञ डॉ अनुराधा मिश्र कहती हैं मस्तिष्क में पाई जाने वाली तंत्रिका कोशिकाएं वैसे तो सामान्य संकेत देती हैं। आम तौर पर न्यूरॉन कहलाने वाली यह कोशिकाएं इलेक्ट्रोकैमिकल प्रभाव उत्पन्न करती हैं जो मानवीय विचार, अहसास उत्पन्न करने और उनके अनुरूप कार्य करने के लिए दूसरी न्यूरॉन, ग्रंथियों और मांसपेशियों को प्रेरित करते हैं। यह एक सामान्य प्रक्रिया होती है। लेकिन मिर्गी के मरीज में यह प्रक्रिया असामान्य हो जाती है।


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