Wednesday, June 1, 2011

सिगरेट पैकेट पर डरावने चित्रों से डरी सरकार


भले ही स्वास्थ्य विशेषज्ञ सिगरेट और गुटखा दोनों को बराबर जानलेवा मानते हों, लेकिन लगता है सरकार सिगरेट को कम खतरनाक मानती है या फिर वह सिगरेट बीड़ी पर डरावने चित्र छापने से डर गई है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने तंबाकू उत्पादों पर छापे जाने के लिए नई सचित्र चेतावनी की अधिसूचना जारी की है। इसके मुताबिक गुटखे के पैकेट पर कैंसर मरीजों की वीभत्स तस्वीरें छापी जाएंगी। जबकि सिगरेट-बीड़ी के पैकेट पर चेतावनी के नाम पर एक सुंदर सा, हष्ट-पुष्ट व्यक्ति दिखाई देगा। स्वास्थ्य मंत्रालय ने लगातार पड़ते दबाव के बाद आखिरकार यह अधिसूचना जारी कर दी। इसे लागू करने के लिए कंपनियों को 1 दिसंबर तक का लंबा समय दिया गया है। सभी तंबाकू उत्पादों के लिए एक जैसी चेतावनी नहीं होगी। सिगरेट, बीड़ी पर छापे जाने के लिए चार तरह के चित्रों का सेट दिया गया है। इसमें तीन चित्र एक स्वस्थ्य और सुंदर व्यक्ति के हैं। चेतावनी के नाम पर सिर्फ इस व्यक्ति के फेफड़े का रंग बदला हुआ है। इस सेट में एक चित्र जरूर मुंह के कैंसर का है, लेकिन सरकार ने यह साफ नहीं किया है कि इन चित्रों का इस्तेमाल किस तरह करना है। इसका फायदा उठाते हुए सिगरेट कंपनियां आसानी से मनपसंद चित्र छाप सकती हैं। इस संदर्भ में मुंबई स्थित टाटा मेमोरियल अस्पताल के कैंसर के चिकित्सक पंकज चतुर्वेदी ने कहा कि तंबाकू का किसी भी रूप में सेवन किया जाए, वह उतना ही खतरनाक है। पता नहीं क्यों सरकार ने सिगरेट कंपनियों के प्रति इतनी दरियादिली दिखाई? स्वास्थ्य मंत्रालय के लिए चेतावनी विज्ञापन और दृश्य प्रचार निदेशालय (डीएवीपी) ने तैयार किया है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने तय किया है कि सचित्र चेतावनी अब एक साल की बजाय दो साल में बदली जाएगी, जबकि मौजूदा कानून के मुताबिक उन्हें हर साल बदला जाना था, क्योंकि एक जैसे चित्र बार-बार देखे जाने पर अपना अपना खो देते हैं। दरअसल सिगरेट कंपनियों ने स्वास्थ्य मंत्रालय पर दबाव बनाया कि वे इसे दो साल कर दें और वह उनके समक्ष झुक गया.


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