Monday, December 20, 2010

जेलों में योग

पंजाब की जेलों में योग केंद्र स्थापित करने का फैसला देर से उठाया गया एक सही कदम है। यह सर्वविदित है कि अंग्रेजों ने अपराधियों की मानसिकता बदलने के लिए ही जेलों का निर्माण किया था और इन्हें सुधार गृह का नाम दिया था, परंतु आज इन सुधार गृहों का चेहरा इतना विकृत हो चुका है कि लंबे समय से इसमें परिवर्तन की आवश्यकता महसूस की जा रही है। अब पंजाब सरकार ने इन सुधार गृहों में योग केंद्र स्थापित करने का फैसला कर वास्तव में इनके सुधार की ओर सोचना शुरू किया है। यह ठीक है कि अभी यह अमृतसर सहित प्रदेश की पांच जेलों में स्थापित किए जाएंगे, परंतु यदि इनसे सरकार को सफलता मिलती दिखाई देती है, तो इनका विस्तार शीघ्रातिशीघ्र प्रदेश की सभी जेलों में किया जाना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि जेलें अब सुधार गृह न होकर कैदियों के लिए अय्याशी का अड्डा बनती जा रही हैं। आए दिन जेलों से मोबाइल व नशीले पदाथरें का बरामद होना इसी की बानगी है। जुर्म कर जेल में आने वाला कैदी यहां बंद अन्य बड़े मुजरिमों से अपराध का और ज्ञान लेकर बाहर लौटता है। एक तथ्य यह भी है कि डंडे के बल पर किसी की मानसिकता नहीं बदली जा सकती है। इस स्थिति में योग लाभकारी सिद्ध हो सकता है। योग का डंका आज भारत समेत पूरी दुनिया में बज रहा है। अत: अब जेलों में योग केंद्र स्थापित होने से यह उम्मीद की जानी चाहिए कि कैदियों की मानसिकता बदलेगी और निश्चित रूप से उनका सुधार होगा। इसके साथ ही सरकार को जेल प्रबंधन को भी सुधारना होगा। बिना जेल प्रबंधन में सुधार के किसी भी प्रकार के सकारात्मक परिणाम की उम्मीद नहीं की जा सकती। जेल में कोई भी कैदी बिना किसी भ्रष्ट जेलकर्मी की सहायता के गैरकानूनी काम नहीं कर सकता। सरकार को देखना होगा कि कैदियों के साथ ही जेलकर्मियों की मानसिकता भी बदले। भ्रष्टाचार हतोत्साहित हो और अराजकता पर भी लगाम लगे।

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