Tuesday, December 21, 2010

हर मर्ज की होगी बस एक दवा!

अगर सब कुछ ठीक रहा तो वो दिन दूर नहीं जब कई बीमारियों का इलाज एक गोली से ही होगा। ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने कुछ ऐसी अभूतपूर्व सफलता मिलने का दावा किया है। वैज्ञानिकों के अनुसार उन्होंने बार-बार उभरने वाले एक हजार से अधिक प्रोटीनों की पहचान कर ली है जो अल्जाइमर की बीमारी से लेकर ऑटिज्म तक की 130 परिस्थितियों के लिए जिम्मेदार होते हैं। उन्होंने कहा है कि इन एक हजार प्रोटीनों में गड़बड़ी का संबंध मस्तिष्क की नाड़ी कोशिकाओं के जंक्शनों के बीच से है। डेली मेल के अनुसार, यह एक ऐसी खोज है जिससे शरीर को कमजोर करने वाली बीमारियों और मनोविकारों के इलाज के लिए नई दवा के विकास में तेजी आ सकती है। वैज्ञानिकों की टीम के अग्रणी अनुसंधानकर्ता और वेलकम ट्रस्ट सैंजर इंस्टिट्यूट में तंत्रिका विशेषज्ञ प्रोफेसर सेथ ग्रांट ने कहा कि इससे दवाओं की खोज के क्षेत्र में एक नया मोर्चा खुल जाने की संभावना है। जाहिर है, जंक्शन बॉक्स वैज्ञानिकों के उत्साह का केंद्र बन गया है। यह मस्तिष्क में नाड़ी कोशिकाओं से जुड़ा रहता है और सूचनाओं के संचारण और प्रोसेसिंग के लिए मुख्य है। मस्तिष्क से सूक्ष्म ऊतक लेकर उनका अध्ययन करने के बाद प्रोफेसर ग्रांट और एडिनबर्ग यूनिवर्सिटी के उनके सहयोगियों ने करीब 1,461 प्रोटीनों की पहचान की। इसके बाद उन्होंने इनका संबंध अल्जाइमर, पार्किंसंस से लेकर ऑटिज्म तक जोड़ा। प्रोफेसर ग्रांट ने कहा कि लाखों लोगों को प्रभावित कर रहीं मानवीय बीमारियों का मध्य केंद्र ये प्रोटीन ही हैं। ग्रांट ने जोड़ा कि कुछ मामलों में जंक्शन पर काम करने वाले प्रोटीन बीमारी की पूरी प्रकृति के लिए बेहद अनिवार्य होते हैं। अल्जाइमर के मामले में, सब जानते हैं कि नाड़ी कोशिकाओं के खत्म होते जाने के साथ मस्तिष्क सिकुड़ता जाता है। मगर जो बात स्पष्ट हुई है वह यह है कि नाड़ी कोशिकाओं का जंक्शन इनके खत्म होने से पहले ही गल या सड़ जाता है। अध्ययन में पता चला है कि कई बीमारियों में एक जैसो प्रोटीन शामिल रहता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इससे विभिन्न परिस्थितियों के दौरान इलाज में मदद मिल सकती है। प्रोफेसर ग्रांट ने कहा कि हम नए जेनेटिक डाइग्नोस्टिक टेस्टों को विकसित करने के तरीकों पर भी विचार कर रहे हैं। साथ ही यह भी देख रहे हैं कि चिकित्सकों की सहायता करने के लिए मस्तिष्क रोगों का कैसे वर्गीकरण किया जाए। अध्ययन में यह भी बताया गया है कि विकास के दौरान प्रोटीन में थोड़ा बदलाव आ जाता है, शायद स्वास्थ्य के लिए यह अनिवार्य होता है। बेयलॉर कॉलेज ऑफ मेडिसिन में तंत्रिका विज्ञान के प्रोफेसर जैफरी नोएबेल्स ने कहा कि हमारे पास अब 1000 से अधिक संदिग्ध प्रोटीनों की व्यापक मॉलीक्यूलर सूची है। इस सूची में हर सातावां प्रोटीन किसी न किसी जानेपहचाने चिकित्सकीय विकार में शामिल है और इनमें से आधे बार-बार उभरने वाले प्रोटीन हैं।

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