चालीस से ज्यादा जिलों में गरीबों को नहीं मिल रहा अनाज स्टेट पूल खत्म होने के बाद आया गंभीर खाद्यान्न संकट खाद्य एवं रसद विभाग व भारतीय खाद्य निगम ने बनायी रणनीति
लखनऊ । प्रदेश के एक करोड़ से ज्यादा गरीब परिवारों के लिए बनी सार्वजनिक वितरण पण्राली (राशन) में खाद्यान्न संकट खड़ा हो गया है। चालीस से ज्यादा जिले इस संकट की गिरफ्त में हैं। इन जनपदों में खाद्यान्न वितरण का रोस्टर पूरी तरह फेल हो चुका है और इनमें रहने वाले गरीब परिवारों को राशन का वितरण रुक गया है। कहीं गरीबों को राशन का गेहूं नहीं मिल पा रहा है, तो कहीं चावल का वितरण नहीं हो पा रहा है। आने वाले दिनों में खाद्यान्न का यह संकट और भी गहराने की आशंका है। राशन वितरण व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाये रखने के लिए प्रदेश में राशन वितरण का रोस्टर है। जिसमें प्रत्येक महीने की 22 तारीख से पहले जिला गोदामों में खाद्यान्न पहुंच जाना चाहिए। हर महीने 23 से 30 तारीख तक खाद्यान्न जिला गोदामों से ब्लाक गोदामों में जाता है और इस अवधि में कोटेदारों को अपने पैसों को जमा करना होता है। महीने की एक से 4 तारीख के बीच खाद्यान का राशन दुकानों में पहुंचने का प्रावधान है,जहां 5 से 20 तारीख के मध्य इसका वितरण गरीबों को होता है। परन्तु पिछले कुछ समय से खाद्यान्य वितरण का यह रोस्टर पूरी तरह फ्लाप हो चुका है और राज्य सरकार को इसमें कई बार बदलाव करना पड़ा है। राज्य की राशन वितरण व्यवस्था में अचानक आया गंभीर संकट स्टेट पूल को खत्म किये जाने का नतीजा है। स्टेट पूल के खत्म होने के बाद राज्य सरकार के पास अपना कोई खाद्यान्न भंडारण नहीं है और वह प्रदेश के गरीबों को राशन बांटने के लिए पूरी तरह से केन्द्र सरकार के केन्द्रीय पूल पर निर्भर है। भारतीय खाद्य निगम द्वारा केन्द्रीय पूल का खाद्यान्न समय पर उपलब्ध न करा पाने के कारण गरीबों को राशन का वितरण रुका है। सूबे के जिन जनपदों में राशन वितरण का संकट आया है उनमें मैनपुरी, आगरा, एटा, झांसी, महोबा, कुशीनगर, सिद्धार्थनगर, औरैया, कन्नौज, हरदोई, गाजीपुर, चंदौली, चित्रकूट, कानपुर, कानपुर देहात, मुरादाबाद, सहारनपुर, फतेहपुर, इटावा, मथुरा, प्रतापगढ़, आजमगढ़, बहराइच, फैजाबाद, देवरिया, सीतापुर, सोनभद्र, कांशीरामनगर, बुलंदशहर, जालौन, ललितपुर, महाराजगंज तथा गोण्डा आदि शामिल हैं। इनमें कुछ में गरीबी रेखा के नीचे के परिवारों को गेहूं नहीं मिल है, तो कुछ में चावल नहीं मिला है। राशन वितरण की गाड़ी वैसे तो इन जनपदों में काफी पहले से गड़बड़ चल रही थी और गरीबों को राशन का वितरण विलंब से चल रहा है, लेकिन अब हालात काफी गंभीर हो चुके हैं। पिछले दो से तीन महीनों से इन जनपदों में गरीबों को राशन नहीं मिला है। प्रभावित जनपदों में गरीबी रेखा के नीचे की बड़ी आबादी बाजार का महंगा राशन खरीदने में सक्षम नहीं है। ऐसे में इनके परिवारों में दो वक्त का चूल्हा नहीं जल पा रहा है। विदित हो कि लक्ष्य आधारित सार्वजनिक वितरण पण्राली में प्रदेश के 1.06 करोड़ परिवारों को राशन का खाद्यान्न उपलब्ध कराने का प्रावधान है। हालांकि गरीबी रेखा के ऊपर के परिवारों को भी राशन का गेहूं मिलता है, लेकिन उनको हर महीने इसका वितरण जरूरी नहीं है। इन्हें राशन के खाद्यान्न का वितरण उपलब्धता के आधार पर कराया जाता है। सूत्रों के मुताबिक वर्ष 1994-95 से चली आ रही राशन व्यवस्था में राज्य सरकार ने पिछले साल बदलाव कर दिया था, जिसमें स्टेट पूल को पूरी तरह खत्म कर दिया गया था। नयी व्यवस्था के लागू होने के बाद से प्रदेश में न तो लक्ष्य के अनुरूप गेहूं की खरीद हो पा रही है और न ही धान की। नतीजा पड़ोसी राज्यों में होने वाली खरीद पर राज्य की राशन व्यवस्था निर्भर हो गयी है। सरकारी आंकड़ें बताते है कि पिछले साल निर्धारित लक्ष्य का आधा खाद्यान्न भी नहीं खरीदा जा सका है। जब स्टेट पूल था तो राज्य सरकार के पास अपना खाद्यान्न भंडारण हुआ करता था, जिसका वह राशन में वितरण कराती थी और खरीद और वितरण के दामों के अन्तर की धनराशि केन्द्र सरकार सब्सिडी के रूप में दे दिया करती थी, लेकिन अब स्टेट पूल तो बचा नहीं है। ऐसे में भारतीय खाद्य निगम जब खाद्यान्न उपलब्ध कराता है तभी राशन में इसका वितरण होता है। राशन वितरण में संकट की बात प्रदेश की खाद्य एवं रसद आयुक्त वीना कुमारी मीणा ने भी स्वीकार की है। उनका कहना है कि राशन वितरण व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए भारतीय खाद्य निगम के आला-अफसरों के साथ लगातार बैठकें हो रही हैं और यह प्रयास किये जा रहे हैं कि सभी जनपदों में केन्द्रीय पूल का राशन समय पर उपलब्ध हो सके । उनका कहना है कि भारतीय खाद्य निगम की गोदामों से गेहूं और चावल के विलंब से मिलने के कारण यह नौबत बनी है। आयुक्त ने बताया कि संकट से निपटने के लिए खाद्य एवं रसद विभाग और भारतीय खाद्य निगम के अफसरों ने एक रणनीति तैयार की है, जिससे आगे चलकर खाद्यान्न संकट के कम होने की उम्मीद है।
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