Sunday, December 26, 2010

गर्भवती महिला पर पहले ही खतरा भांप लेगा नया टेस्ट

लंदन, एजेंसी : वैज्ञानिकों ने एक ऐसा परीक्षण विकसित करने का दावा किया है, जो उच्च रक्तचाप से पीडि़त महिलाओं में गर्भावस्था के दौरान होने वाली ज्यादा जटिलताओं के बारे में पहले ही बता देगा। हर 10 में से एक महिला को उच्च रक्तचाप के कारण मूत्र में प्रोटीन जाने की परेशानी (प्री-एक्लेंप्सिया) होती है। ऐसी कई महिलाओं की गर्भावस्था के दौरान उनके जीवन को भी खतरा पैदा हो जाता है। इसका एकमात्र उपचार बच्चे को जल्दी जन्म देना होता है। द लैंसेट पत्रिका की रिपोर्ट के मुताबिक ब्रिटिश कोलंबिया विश्वविद्यालय के एक दल ने ऐसा परीक्षण ईजाद किया है जिससे महिलाओं में प्री-एक्लेंप्सिया के बारे में पहले ही बताया जा सकेगा, कब महिला के लिए दौरा, कोमा या मृत्यु की स्थिति पैदा हो सकती है। वैज्ञानिकों ने मां के लक्षणों, पूर्व इलाज का इतिहास, कार्डियोवेस्कुलर संकेत, रक्त, किडनी के परिणाम, लिवर परीक्षण और भ्रूण संबंधी परीक्षणों पर एकत्रित आंकड़ों का इस्तेमाल गणना करने के लिए किया। उन्होंने प्री-एक्लेंप्सिया वाली 2000 से ज्यादा महिलाओं के आंकड़ों की गणना की जिनमें से 13 फीसदी में जटिलताएं विकसित हो गई थीं। मगर इनमें से किसी की मृत्यु नहीं हुई। फुलपियर्स नामक इस गणना के फलस्वरूप ऐसी तीन चौथाई से ज्यादा महिलाओं की पहचान हुई जिन पर बाद में होने वाला खतरा काफी ज्यादा था। जबकि सिर्फ 16 फीसदी ऐसी महिलाएं थीं जिनमें उच्च्च खतरे की पहचान गलत हुई। द डेली टेलीग्राफ में प्रकाशित खबर के अनुसार, वैज्ञानिकों ने कहा है कि नई खोज पुराने परीक्षणों को खारिज कर सकती है और इनका स्थान ले सकती है। इससे प्रयोगशाला में होने वाले खर्च में भी कमी आएगी। सह शोधकर्ता डॉ. पीटर वॉन ने बताया कि फुलपियर्स मॉडल जटिलताएं उभरने से सात दिन पूर्व ही ऐसी महिलाओं की पहचान कर लेता है जिनमें खतरा बढ़ रहा होता है और इसके परिणाम बेहद खतरनाक हो सकते हैं।

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