चिकित्सकों ने मुड़ी ऐडि़यों (क्लब फीट) के साथ पैदा होने वाले बच्चों के उपचार का एक नया तरीका खोजने का दावा किया है। क्लब फीट नाम की यह बीमारी लगभग 800 बच्चों में से किसी एक को होती है। जिन बच्चों को यह परेशानी होती है, उनके ऑपरेशन और कई महीनों के उपचार के बाद वे सामान्य तौर पर चल पाते हैं। डेली मेल की खबर के मुताबिक, चिकित्सक अब इसके नए उपचार के तहत एक विशेष प्रकार के जूतों का उपयोग कर रहे हैं। इस बहुचरणीय उपचार प्रक्रिया का विकास कोवेंट्री यूनिवर्सिटी अस्पताल के चिकित्सकों ने किया है। इस नई पद्धति के बारे में बाल हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. इरेन वॉन डेर ने बताया, इस प्रक्रिया से कम दर्द होगा, संक्रमण की आशंका कम होगी तथाच्बच्चे का पैर और लचीला हो जाएगा। मुड़ी एडि़यों के दो-तिहाई मामलों में दोनों ही पैर प्रभावित होते हैं। इस रोग से प्रभावित शिशुओं को एक बड़ा ऑपरेशन कराना पड़ता है और कुछ महीने तक भीषण पीड़ा सहने के बाद ही उनके सामान्य रूप से चलने की स्थिति बन पाती है। लेकिन नए इलाज से ठीक होने की प्रक्रिया अब इतनी जटिल नहीं रहेगी। नए इलाज में प्रभावित पैरों को घुटनों के नीचे से एक सांचे में रखा जाता है। इतने समय में यह तकलीफ दूर हो जाती है। यह चिकित्सकीय सांचा भी एक लचीले किस्म के प्लास्टर से बना होता है जिसे सामान्य पट्टी की तरह बांधा जा सकता है। हर हफ्ते एक बार इस सांचे को हटा दिया जाता है। उसके बाद पैर को सामान्य रूप से हिलाने और सामान्य स्थिति में रखने की कोशिश की जाती है। चिकित्सकों का कहना है कि परंपरागत रूप से शिशुओं को कमर से पैर तक सांचे में रखा जाना होता है। लेकिन इस प्रक्रिया में घुटने को इलाज से अलग रखा जाता है। एक बार जब प्लास्टर हटा दिया जाता है तो शिशु को खास किस्म से बनाए गए जूते पहनाए जाते हैं। इसमें धातु की छड़ें लगी होती हैं। तीन महीने के लिए प्रतिदिन पैर को 23 घंटे के लिए जूते में ही रखना होता है। उसके बाद सिर्फ रात में दो से चार घंटे के लिए पैर जूते में रखने होते हैं। इससे पहले परंपरागत विधि में बच्चों को नौ माह की अवस्था में एक बड़े आपरेशन का सामना करना पड़ता था। पैर को पूरी तरह से शरीर से अलग किए जाने के बाद उसे वापस सही तरीके से जोड़ा जाता था। नए सिरे से पैर लगाने पर इसके जख्म भरने की अवधि भी अधिक और बहुत पीड़ादायी होती थी।
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