लखनऊ , वर्ष 2007 में सत्ता में आने के बाद बसपा सरकार की पहली ही कैबिनेट बैठक में अगर ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए संविदा के आधार पर डाक्टर रखने का फैसला हुआ तो मतलब साफ था कि गांवों की बदहाल स्वास्थ्य सेवा का इल्म उसे था। इस निर्णय का स्वागत हुआ था। उसकी वजह थी कि सरकार ने रिक्त पदों को भरने के लिए नई भर्ती होने का इंतजार करने बजाय एक नया रास्ता चुना, लेकिन सरकार की यह कोशिश इस वजह से परवान नहीं चढ़ पाई कि गांवों में जाने के लिए डाक्टर साहेबान तैयार ही नहीं हुए। सरकार लगभग डेढ़ हजार पदों पर संविदा के आधार पर डाक्टर रखने की ख्वाहिश मंद थी लेकिन सिर्फ चार सौ ही डाक्टर मिल पाए। सरकार ने अपने वादे को निभाने के लिए आयुष (आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी) डाक्टरों को संविदा के आधार पर रखना शुरू किया लेकिन इसमें केंद्र सरकार ने अडंगा डाल दिया। केंद्र सरकार का कहना है कि इन डाक्टरों के पास जब एलोपैथिक डिग्री नहीं तो एलोपैथिक इलाज कैसे कर सकते हैं? ऐसे में आयुष डाक्टरों की संविदा रद हो गई। हालांकि सरकार कह रही है कि उसने संविदा के आधार पर डाक्टर रखने की जो नीति तय की है, उसके आधार पर वह रिक्त पदों को भरने के लिए प्रयासरत है लेकिन जानकारों का कहना है कि संविदा पर भी डाक्टर इसलिए नहीं मिल रहे हैं कि सरकार ने जो पैसा तय कर रखा है (18 हजार रुपये महीने), वह कम है। ऊपर से एक दिन की अनुपस्थित पर पांच सौ रुपये की कटौती का भी नियम है। मिशन से लगा भ्रष्टाचार का घुन : ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर करने में केंद्र सरकार का राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन भी कामयाब नहीं हो पाया। केंद्रीय अनुदान से अस्पतालों की साज-सज्जा तो बेहतर हुई परंतु चिकित्सकों व स्टाफ की भरपाई नहीं हो पाई। मिशन के तहत 6 हजार करोड़ की आर्थिक इमदाद मिलने के बाद स्वास्थ्य सुविधाएं सुधरने के बजाय विभाग को भ्रष्टाचार की बीमारी लग गई। लखनऊ में ताबड़तोड़ दो-दो सीएमओ मार दिए गए। खुद सरकार ने माना कि विभाग में कर्मचारियों के स्तर पर भ्रष्टाचार पनपा है। इसके चक्कर में दो विभागों परिवार कल्याण एवं स्वास्थ्य के मंत्रियों को इस्तीफा देना पड़ गया। महानिदेशक डॉ. एसपी राम का कहना है कि चिकित्सकों और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी को खत्म करने के प्रयास किए जा रहे हैं। 389 चिकित्सकों की नियुक्ति लोक सेवा आयोग के जरिए की गई। संविदा पर नियुक्तियों में आ रही तकनीकी बाधा को दूर करने की कोशिश की जा रही है।
No comments:
Post a Comment