Sunday, May 22, 2011

यूपी में स्कूलों के स्वास्थ्य कार्यक्रम को मारा लकवा


उत्तर प्रदेश में चलाया गया विद्यालय स्वास्थ्य कार्यक्रम खुद बीमार हो गया है। कुछ अध्यापकों को प्रशिक्षण देने के बाद कार्यक्रम को लकवा मार गया है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें काम नहीं कर रही हैं। यही वजह है कि बच्चों के सेहत की रिपोर्ट गोल है। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन कार्यक्रम के तहत 2009-10 में विद्यालय स्वास्थ्य कार्यक्रम शुरू किया गया था। इसमें करीब सवा दो लाख बच्चों की सेहत की देखभाल की जानी थी। उन्हें बताया जाना था कि वह गर्मी में कैसा भोजन लें और किस तरह के भोजन से परहेज करें। कार्यक्रम को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए ब्लॉक स्तर पर अध्यापकों के प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई थी। स्वास्थ्य विभाग की टीमों को स्कूल का दौरा कर बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण करने और उसका लेखा जोखा स्वास्थ्य रजिस्टर और बच्चे के हेल्थ कार्ड में अंकित करना था। इतना ही नहीं, टीम को बच्चों को पेट के कीड़े मारने, आयरन व फोलिक एसिड की गोलियां भी वितरित करनी थीं। यह है कार्यक्रम की हकीकत : ब्लॉक स्तर पर 40-40 शिक्षकों को बाल स्वास्थ्य के संबंध में दो दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की टीमों को स्कूलों में जाकर बच्चों का परीक्षण, उनमें दृष्टि दोष, कुपोषण, साफ- सफाई, भोजन आदि के बारे में जानकारी देनी थी। शिक्षा विभाग के मिड-डे मील के आंकड़ों के मुताबिक, 2010-11 में उन्हें स्वास्थ्य विभाग से किसी तरह की प्रगति या स्वास्थ्य परीक्षण की रिपोर्ट नहीं मिली। बच्चों के परीक्षण से संबंधित रजिस्टर में भी कोई सूचना अंकित नहीं है। मिड-डे मील के जिला समन्वयक खेलेंद्र सिंह राणा ने बताया कि बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण का कोई रिकार्ड विभाग को नहीं भेजा गया। एमडीएम टास्क फोर्स की बैठक में भी यह मुद्दा उठाया था। डिप्टी सीएमओ डा. एसपी सिंह ने कहा कि हमने गत वर्ष 60 स्कूलों में इस कार्यक्रम के तहत कार्य किया है। 60 और विद्यालय चिह्नित किए हैं। सीमित संसाधनों में ही सही, बेहतर प्रयास किए जा रहे हैं।


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