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नई दिल्ली (एसएनबी)। मधुमेह से पीड़ित
50 से
60 फीसद
मरीज इरेक्टाइल डिसफंक्शन
से ग्रस्त हैं। इरेक्टाइल डिसफंक्शन की वजह से यौन समस्याएं पैदा हो
रही हैं। ऐसे रोगियों के हार्मोन असंतुलन को ठीक कर उनके स्वस्थ यौन जीवन
को दोबारा वापस लाया जा सकता है। रिसर्च सोसाइटी फॉर द स्टडी ऑफ डायबिटीज
इन इंडिया द्वारा उत्तर भारत में कराए गए सव्रे के बाद यह निष्कर्ष निकाला गया है। आरएसएसडीएआई
दिल्ली शाखा के चेयरमैन डॉ. राजीव
चावला व सचिव डॉ. बीएम मक्कर ने संयुक्त रूप से संवाददाता
सम्मेलन में जानकारी
देते हुए बताया कि मधुमेह पीड़ितों में यौन ग्रंथियां सिकुड़ जाती हैं
लिहाजा उत्तेजित होने की प्रक्रिया बाधित होती है। स्टडी रिपोर्ट 23 सितम्बर को आयोजित
आठवें वार्षिक सम्मेलन में पेश की जाएगी। डॉक्टरों ने बताया कि उत्तर भारत में व्यापक सव्रे
कराया गया है। सव्रे के आधार पर
सोसाइटी ने सुझाव दिया है कि 40
साल से अधिक उम्र के हर मधुमेह रोगी की एडम स्कोर
जांच होनी चाहिए। इस अध्ययन के तहत 35
से 60 वर्ष
की उम्र वाले 200 पुरुषों
पर अध्ययन किया गया। अध्ययन में पाया गया कि जो लोग मधुमेह से पीड़ित
नहीं होते हैं उनकी तुलना में मधुमेह रोगियों में यौन हार्मोन टेस्टोस्टेरॉन
का स्तर बहुत कम होता है। गौरतलब है कि टेस्टोस्टेरॉन वह रासायनिक पदार्थ है जो पुरुषों में
यौन सक्रियता को बनाए रखता है और
वीर्यकोष से उत्सर्जित होता है। डॉ. चावला ने बताया कि
इरेक्टाइल डिसफंक्शन के शुरुआती लक्षणों की पहचान और इलाज के लिए एडम स्कोर जांच
प्रश्नावलियों पर
आधारित जांच विधि है, जिसके
तहत मरीजों को दस सवालों के जवाब देने होते हैं। यह नि:शुल्क लेकिन कारगर परीक्षण
है। रविवार को आठवें वार्षिक
सम्मेलन में इस बीमारी से संबंधित विशेषज्ञ डॉक्टर विस्तार
से र्चचा करेंगे।
मधुमेह और हृदय रोगियों के लिए अनुदान देगा मैडट्रोनिक : ़संयुक्त राष्ट्र
संघ की संस्था मैडट्रोनिक के कार्यकारी निदेशक डॉ. जैकब गेल ने शुक्रवार
को संवाददाता सम्मेलन में घोषणा की है कि भारत में उपेक्षित मधुमेह
और हृदय रोग से पीड़ित लोगों के इलाज के लिए छह मिलियन डॉलर का अनुदान
दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि हर साल तीन मिलियन लोग भारत में हृदय रोग
से मरते हैं। यहां 60 मिलियन
मधुमेह से पीड़ित लोग हैं, जो दुनिया के
किसी भी देश से अधिक हैं। नेशनल हेल्थ मिशन प्रोग्राम को आगे
बढ़ाने के लिए पांच
साल तक किस्तवार गैर सरकारी संस्थाओं के जरिए धन मुहैया कराया जाएगा जिसका
लाभ मरीजों को मिलेगा।
इसकी वजह से पैदा हो रही हैं यौन समस्याएं रिसर्च
सोसाइटी फॉर द स्टडी ऑफ डायबिटीज इन इंडिया ने उत्तर भारत में सव्रे कराने के बाद निकाला निष्कर्ष
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राष्ट्रीय सहारा दिल्ली संस्करण पेज-8, 22-9-2012 स्वास्थ्य
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