Saturday, September 22, 2012

दर्दनिवारक गोली भी दे सकती है सिरदर्द




लंदन, प्रेट्र : दर्दनिवारक गोली का इस्तेमाल तकलीफ दूर करने की बजाय सिरदर्द का कारण भी बन सकता है। हालिया हुए एक अध्ययन के मुताबिक दर्दनिवारक का अधिक प्रयोग दिमाग को दर्द के प्रति जरूरत से ज्यादा संवेदनशील बना देता है। इससे पहले वाले दर्द से भले राहत मिल जाए लेकिन सिरदर्द होने का खतरा बढ़ जाता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि दर्दनिवारक के ज्यादा इस्तेमाल की वजह से पचास में से एक व्यक्ति को हर रोज सिरदर्द की शिकायत रहती है। द डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक सिरदर्द की शिकायत उन लोगों में ज्यादा होती है जो हर दूसरे दिन एस्पिरीन, ब्रूफेन और पैरासिटामोल का प्रयोग करते हैं। ब्रिटेन की एक स्वास्थ्य संस्था नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ एंड क्लिनिकल एक्सीलेंस का कहना है कि दर्दनिवारक लगातार लेते रहने से यह दर्द असहनीय अवस्था में भी पहुंच सकता है। संस्था का कहना है कि इन दर्दनिवारकों के स्थान पर इनके विकल्प लेना ज्यादा हितकर है। ट्रिपटैन्स इसका बेहतर विकल्प है। दमा अनुसंधान में सफलता वाशिंगटन : वैज्ञानिकों ने संभवत: अस्थमा के हमले को रोकने के लिए एक प्रभावी रास्ता ढूंढ लिया है और इसके तहत उन्होंने दो अति महत्वपूर्ण जैविक कारकों की पहचान की है। यूनिवर्सिटीज ऑफ कैलिफोर्निया-सानफ्रांसिस्को (यूएससीएसएफ), जॉन्स हॉपकिंस एवं डयूक यूनिवर्सिटीज के अनुसंधानकर्ताओं ने पाया है कि अस्थमा की रोकथाम के ये दो कारक कैल्शियम द्वारा सक्रिय एक विशेष क्लोराइड चैनल से बंधे हुए हैं, जिसे टीएमईएम16ए कहा जाता है। प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज नामक पत्रिका के अनुसार, ये कारक हवा के उत्सर्जन और मांसपेशियों के सहज संकुचन को नियंत्रित करते हैं। ये दो प्रमुख कारक अस्थमा के हमले से जुड़े हुए हैं। अध्ययन के वरिष्ठ लेखक एवं यूसीएसएफ में एनाटॉमी (शरीर रचना विज्ञान) के सहायक प्रोफेसर, जेसन रॉक ने कहा कि यदि हम इस एक चैनल को अवरुद्ध करके इन दोनों प्रक्रियाओं को रोक सकें तो हम अस्थमा के दो लक्षणों पर असर डाल सकते हैं। स्वीडन में गर्भाशय का पहला सफल प्रत्यारोपण लंदन : स्वीडन में शल्य चिकित्सकों को मां के गर्भाशय का बेटी में प्रत्यारोपण करने में सफलता मिली है। इससे दो महिलाएं अब मां बन सकेंगी जिनमें से एक का गर्भाशय कैंसर के कारण निकाल दिया गया था जबकि दूसरी का गर्भाशय ही नहीं था। दुनिया के इस पहले सफल गर्भाशय प्रत्यारोपण में मां ने अपने गर्भाशय को दान करके अपनी बेटी को मां बनने का अवसर दिया है। दोनों महिलाओं और उसकी बेटियों का नाम गुप्त रखा गया है। स्वीडन के यूनिवर्सिटी ऑफ गोदनबर्ग में दस शल्य चिकित्सकों की देखरेख में यह प्रत्यारोपण हुआ। हालांकि डॉक्टर इसे तब तक सफल नहीं मान रहे हैं जब तक कि ये महिलाएं सफलतापूर्वक गर्भ धारण न कर लें। प्रत्यारोपण से जुड़े एक चिकित्सक मिशेल ओलाउसन के मुताबिक जब तक एक स्वस्थ बच्चे का जन्म नहीं हो जाता हम इस ऑपरेशन को सफल नहीं मान सकते। इन दोनों ही महिलाओं की उम्र 30 के आस-पास है। एक महिला को जहां गर्भाशय के कैंसर के चलते अपना गर्भाशय निकलवाना पड़ा वहीं दूसरी महिला में जन्म से ही गर्भाशय नहीं था। गर्भाशय दान करने वाली दोनों महिलाओं को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। इससे पूर्व गर्भ के प्रत्यारोपण का एक मामला सउदी अरब में भी प्रकाश में आया था। लेकिन जिस महिला में इसे प्रत्यारोपित किया गया था उसके शरीर में खून का थक्का जमने लगा। जिसके चलते तीन महीने बाद ही उसे दोबारा निकाल लिया गया था।

दैनिक जागरण राष्ट्रीय संस्करण पेज -14,20-9-2012  LokLF;

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