वाशिंगटन, प्रेट्र : कैंसर के तीसरे चरण में पहुंच चुके मरीजों के परीक्षण के बाद जो निष्कर्ष सामने आया है, उससे शादी के लड्डू खाकर परेशान लोगों को अपने विचार बदलने की एक और वजह मिल जाएगी। ताजा अध्ययन से पता चला है कि शादीशुदा मरीजों में कैंसर ठीक होने की संभावना उन लोगों से ज्यादा होती है जो अकेले हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ मेरीलैंड 168 मरीजों पर अध्ययन के बाद इस नतीजे पर पहुंची है। इन सभी को फेफड़े का कैंसर था और सभी की पिछले 10 साल से कीमोथेरेपी की जा रही थी। अध्ययन में पाया गया कि 33 फीसद शादीशुदा मरीज कैंसर के बावजूद जिंदा थे। जबकि बगैर विवाह वाले 10 फीसद मरीज ही जिंदा थे। इस अध्ययन का नेतृत्व कर रही एलिजाबेथ निकोलस के अनुसार फेफड़े के कैंसर के ठीक होने में विवाह अहम भूमिका निभाता है। इसकी वजह तो नहीं पता है लेकिन ऐसा लगता है कि शादीशुदा मरीजों की बेहतर देखभाल होती है, जिससे उनमें बीमारी से लड़ने की क्षमता बढ़ती है। इससे पहले के अध्ययन में पाया गया था कि प्रोस्टेट, सिर और गले के कैंसर के ऐसे मरीजों की मौत की आशंका ज्यादा होती है जो शादीशुदा नहीं होते हैं। बाल यौन शोषण के शिकार पुरुषों में हार्ट अटैक का खतरा तिगुना टोरंटो : बाल्यावस्था में यौन शोषण के शिकार हुए पुरुषों में दिल के दौरे (हार्ट अटैक) का खतरा तीन गुना अधिक रहता है। एक नए अध्ययन में यह दावा किया गया है। यूनिवर्सिटी ऑफ टोरंटो के शोधकर्ताओं ने पुरुषों के मामले में बचपन में यौन शोषण और दिल के दौरे के बीच संबंध होने के बारे में पता लगाया है। हालांकि महिलाओं के विषय में इस संबंध का पता नहीं चला है। मुख्य शोधकर्ता एसमे फ्युलर-थॉमसन ने बताया कि जिन पुरुषों ने बचपन में अपने साथ यौन शोषण होने की बात कही, उनमें दिल का दौरा पड़ने की आशंका अधिक पाई गई। अध्ययन में 18 वर्ष और इससे अधिक आयु के 5095 पुरुषों और 7768 महिलाओं को शामिल किया गया। 57 पुरुषों और 154 महिलाओं ने बताया कि 18 वर्ष की आयु से पहले वे अपने नजदीकी व्यक्तियों द्वारा यौन शोषण का शिकार हुए थे। छरहरी काया की चाहत न करे दे बीमार नई दिल्ली : छरहरी काया को लेकर आज की युवतियां ज्यादा चिंतित रहती हैं। इसीलिए वे डाइटिंग करती हैं और कुपोषण का शिकार हो रही हैं। गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के इस बयान से भले ही राजनीतिक दल इत्तेफाक न रखते हों, लेकिन दिल्ली के डॉक्टरों की मानें तो राजधानी में भी युवतियों में छरहरी काया के लिए होड़ मची हुई है। आलम यह है कि विशेषज्ञों की सलाह लिए बिना ही डाइटिंग का सहारा लेने वाली ये युवतियां दूसरी बीमारियों से भी ग्रसित हो जाती हैं। मैक्स अस्पताल की आहार विशेषज्ञ डॉ. रीतिका समादार का कहना है कि युवतियों में छरहरी काया का जबरदस्त क्रेज है और हर सप्ताह 6 से 7 युवतियां आती हैं, जिसमें टीनएजर्स भी होते हैं। कई बार जल्दीबाजी में ऐसी युवतियां साइड इफेक्ट के शिकार हो जाती हैं और बाल झड़ना, त्वचा रूखा होना और पेट संबंधी दिक्कतों के साथ साथ उनका इम्यून सिस्टम भी बिगड़ जाता है। डॉ. आशा शर्मा कहती हैं कि मेरे पास 18 से 22 साल की ऐसी युवतियां आती हैं जो बिना किसी विशेषज्ञ की सलाह लिए डाइटिंग शुरू करने की वजह से बीमार हो जाती हैं। इनमें से अधिकांश के पीरियड पर प्रभाव पड़ता है।
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