Monday, September 10, 2012

चिकित्सकों की भारी कमी से जूझ रहे हैं रेलवे अस्पताल



विनोद श्रीवास्तव/एसएनबी नई दिल्ली। खुले बाजार से चिकित्सकों की मांग न पूरी हो पाने की दशा में भारतीय रेलवे ने अपने सेवानिवृत्त चिकित्सकों से सेवाएं लेने का निर्णय लिया है, ताकि कम से कम दस फीसद चिकित्सकों की कमी पूरी जा सके। लेकिन जिन सेवा शर्तो के साथ रेलवे के सेवानिवृत्त चिकित्सकों से सेवाएं लेने का निर्णय लिया गया है, उससे कम ही संभावना लगती है कि ये चिकित्सक अपनी सेवाएं रेलवे को देंगे। भारतीय रेलवे में मौजूदा समय में चिकित्सकों की 35 फीसदी कमी है, लेकिन इन पदों पर भर्तियां नहीं हो पाई हैं। लिहाजा, रेलवे को अनुबंध के आधार पर चिकित्सकों की सेवाएं लेकर काम चलाना पड़ रहा है। अब बाहर के चिकित्सकों से भी पूर्ति नहीं हो पा रही है तो रेलवे के सेवानिवृत्त चिकित्सकों से सेवाएं लेने का फैसला करना पड़ा है। भारतीय रेलवे के अस्पताल चिकित्सकों की जर्बदस्त कमी की त्रासदी झेल रहे हैं। रेलवे के बड़े अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सकों की कमी के कारण मौजूदा चिकित्सकों पर मरीजों का बोझ बढ़ता जा रहा है। इन अस्पतालों में सेवारत रेलकर्मियों व सेवानिवृत्त रेलकर्मियों के परिवार के लोगों के इलाज का जर्बदस्त बोझ है। इसके इतर स्थिति यह है कि रेलवे में 35 फीसदी चिकित्सकों की कमी है, जिसको पूरा करने के लिए अनुबंध के आधार पर बाजार से 20 फीसदी चिकित्सकों की भरपाई की गई है, लेकिन अब और ज्यादा चिकित्सक बाजार से नहीं मिल रहे हैं तो रेलवे के सेवानिवृत्त चिकित्सकों की सेवाएं लिए जाने का निर्णय लिया गया है। रेल मंत्रालय के ताजा आदेश के मुताबिक रेलवे के सेवानिवृत्त चिकित्सक 65 वर्ष की आयु तक अपनी सेवाएं रेलवे को दे सकेंगे। इसके लिए उन्हें प्रति माह 46 हजार रुपए दिए जाएंगे। यह धनराशि और पेंशन के रूप में मिलने वाली धनराशि, दोनों को जोड़कर 85 हजार रुपए प्रति माह से अधिक नहीं होना चाहिए। दरअसल, छठे वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद सेवानिवृत्त होने वाले रेलवे चिकित्सकों को पेंशन अधिक मिल रही है। ऐसे में यदि ये चिकित्सक अपनी सेवाएं रेलवे को देते हैं तो हो सकता है उन्हें 46 हजार रुपए प्रति माह से भी कम वेतन मिले। लिहाजा वे इसके लिए ज्यादा इच्छुक नहीं दिखाई दे रहे हैं। इसके पीछे कई अन्य कारण भी हैं। डॉक्टरों की कमी को पूरा करने के लिए रेलवे ने जिस तरह से बाजार से चिकित्सकों को अनुबंध के आधार लाने का प्रयास किया, उसमें उसे ज्यादा सफलता नहीं मिली। यही कारण रहा कि उसे सेवानिवृत्त चिकित्सकों की सेवाएं लेने का सहारा लेना पड़ा है। रेलवे की ओर से अनुबंध के आधार पर बाजार से आने वाले सामान्य चिकित्सक को प्रति माह 39 हजार रुपए वेतन मिलता है जबकि विशेषज्ञ चिकित्सकों को 46 हजार रुपए। इन्हें हर साल महंगाई भत्ते की बढ़ी हुई धनराशि और अन्य सुविधाएं नहीं मिलती हैं। ऐसे में यह समझा जाता है कि ये चिकित्सक अपनी निजी प्रैक्टिस को ज्यादा कारगर मानते हैं। इसलिए वे अनुबंध के आधार पर अपनी सेवाएं देने में ज्यादा इच्छुक नहीं दिखाई देते। सेवानिवृत्त चिकित्सकों की सेवाएं लेने का फैसला


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