Friday, September 7, 2012

सफदरजंग अस्पताल : धड़कन की निगरानी रामभरोसे!



ज्ञान प्रकाश/एसएनबी नई दिल्ली। जब हार्ट पेशेंट को अटैक आता है तो इस गंभीर हालत से उसे बचाने के लिए इंटेसिव केयर कार्डियक यूनिट में एडमिट किया जाता है। ऐसे में उसे वेंटीलेटर और दिल की धड़कन पर लगातार नजर रखने वाले ईसीजी मॉनीटर की सख्त जरूरत होती है। दिल्ली में केंद्र सरकार के बड़े अस्पताल सफदरजंग के कार्डियक आईसीसीयू में वेंटीलेटर ही नहीं है। कार्डियक रोगी 54 वर्षीय डा. एके मोदी की अस्पताल प्रशासन की इस व्यवस्था के चलते जान पर बन आई। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय में अतिरिक्त निदेशक पद से हाल में सेवानिवृत्त हुए डा. मोदी को हार्ट अटैक होने पर यहां रविवार की रात लाया गया था। वे दमा के रोगी भी हैं। जब उनका सांस फूलने लगा तब उन्हें घंटों यह कहते हुए डाक्टर इंतजार कराते रहे कि अभी वेटीलेंटर मशीन यहां लाई जाएगी। उनके रिश्तेदार जब वास्तविकता की तह तक पहुंचे तो पता चला कि यहां पर यह सुविधा ही नहीं है। फिर वे हरकत में आए और तुरंत उन्हें अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान(एम्स) के हृदय वक्र तंत्रिका शल्य विज्ञान केंद्र के प्रमुख डा. आरके बहल की यूनिट में भर्ती कराया गया। जहां पर उनकी बायपास सर्जरी की गई। उनके बेटे रोहित ने कहा कि पिता जी सीजीएचएस के लाभार्थी हैं, इसलिए उन्हें यहां भर्ती कराया गया था। लेकिन यहां तो सुविधा ही नहीं है। उनके साथ ही यहां भर्ती अन्य रोगी भी तौबा कर रहे हैं। जानकारी के अनुसार सफदरजंग के कार्डियालॉजी विभाग में कुछ बेड के किनारे ईसीजी मॉनीटर रखे हैं लेकिन उनमें से चलता सिर्फ एक या दो ही है। जबकि आईसीसीयू में 10 बिस्तर और कार्डियक वार्ड में 21 बिस्तर हैं। खास बात यह है कि ये बिस्तर कभी भी खाली नहीं रहते। ऐसे में मरीजों की जान के साथ यह खिलवाड़ वाली ही बात है। बता दें कि मरीजों की संख्या के मामले में सफदरजंग सबसे बड़ा अस्पताल है और यहां गंभीर हालत में रेफर मामले आते हैं। अन्य मरीजों के परिजनों की शिकायत पर जब बुधवार को आईसीसीयू का मुआयना किया तो हालत चौंकाने वाले थे। आईसीसीयू यूनिट में रखे दर्जनभर बिस्तर मरीजों से भरे थे। वहां करीब आधे बिस्तरों के पास ईसीजी मॉनीटर रखे थे। लेकिन उनमें से सिर्फ एक ही चालू हालत में था। बाकी के दिलों की मानीटरिंग भगवान भरोसे थी। कार्डियक वार्ड की भी कमोवेश ऐसी ही हालत थी। वहीं आईसीसीयू में वेंटीलेटर थे ही नहीं। बता दें कि अटैक पड़ने की दशा में कई बार सांस न आने की दिक्कतें आ जाती है। मरीजों के परिजनों का कहना था कि हम बाहर से आए हैं और हमें इस दशा के बारे में नहीं पाता था। लेकिन अब हमारे पास यहीं इलाज करवाने के सिवा कोई चारा नहीं है। इस बारे में अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डा. बीडी अथानी ने कहा कि कार्डियक यूनिट की मरम्मत कराई जा रही है, इसे जल्द ही नई विंग में शिफ्ट किया जाएगा। इस दौरान रोगियों को कुछ समस्याएं हो रही है, इससे बचने के लिए सांस फूलने वाले रोगियों को इमरजेंसी में शिफ्ट कर दिया जाता है जहां पर आईसीसीयू में चार बिस्तर वार्ड में भर्ती रोगियों के लिए आरक्षित रखा जाता है। कार्डियक आईसीसीयू में नहीं है वेंटीलेटर की सुविधा

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