नजफगढ़ स्थित खैरा डाबर गांव में देश का सबसे बड़ा हर्बल उद्यान विकसित किया जाएगा। करीब 70 एकड़ क्षेत्रफल में विकसित होने वाले इस उद्यान में औषधीय महत्व के 500 से भी अधिक प्रजातियों के पेड़ पौधे विकसित किए जाएंगे। लगभग 30 करोड़ की लागत से विकसित होने वाले इस उद्यान को पूर्ण रूप से विकसित होने में लगभग पांच वर्ष लगेंगे। योजना के मुताबिक विस्तृत भूखंड में फैले इस उद्यान में हर्बल ट्रीटमेंट कैंप की भी स्थापना की जाएगी जहां जड़ी बूटियों द्वारा प्रकृति की गोद में लोग स्वास्थ्य लाभ ले सकेंगे। खैरा डाबर गांव में बन रहा यह उद्यान एशिया के सबसे बड़े आयुर्वेदिक संस्थान चौ ब्रह्मम प्रकाश आयुर्वेदिक चरक संस्थान से जुड़ी विकास योजना का एक अहम हिस्सा है। यहां से प्राप्त जड़ी बूटियों का उपयोग खैरा डाबर स्थित आयुर्वेदिक अस्पताल में किया जा सकेगा। इससे अस्पताल दवाइयों के मामले आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर होगा। संस्थान के विद्यार्थियों को भी शोध के संबंध में ज्यादा विकल्प उपलब्ध होंगे। ताजा जड़ी बूटियां मरीजों के उपचार में ज्यादा असरकारक सिद्ध होतीे हैं। इस खातिर दवा निर्माण से जुड़ी इकाई भी यहां स्थापित की जाएगी। संस्थान से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि इस बावत एक उच्च स्तरीय कमेटी भी गठित की जा रही है। कमेटी में नेशनल मेडिटेशनल प्लांट बोर्ड व सेंटर ऑफ मेडिटेशनल एंड एयरोमेटिक प्लांट की भी भागीदारी रहेगी। अधिकारियों ने बताया कि उद्यान संबंधी योजना के बावत अप्रैल में गवर्निग काउंसिल की बैठक होगी। इसके बाद उद्यान का निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। परियोजना निदेशक डॉक्टर बीएस बनर्जी ने बताया कि इस योजना पर केंद्र सरकार ने भी दिलचस्पी दिखाई है। हमें मुफ्त में उद्यान बनाकर देने की बात कही जा रही है। इसके अलावा हम अपने बूते उद्यान विकसित कर सकते हैं। दोनों ही विकल्प हमारे पास हैं। अप्रैल में होने वाली गवर्निग काउंसिल की बैठक में अंतिम फैसला कर लिया जाएगा|
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