Tuesday, March 29, 2011

सावधान! जानलेवा है इस चाय की चुस्की


 न्यूज नेटवर्क क्या आप प्लास्टिक की पन्नी में लाई हुई चाय को प्लास्टिक के कप डालकर पीते हैं? क्या आप पन्नी में पैक भोजन करते हैं? अगर ऐसा है तो तत्काल यह काम बंद कर दीजिए। इससे आप लिवर और किडनी की बीमारियों से ग्रस्त हो सकते हैं। इससे कैंसर भी हो सकता है। बाजार में आमतौर पर बिकने वाली प्लास्टिक की पन्नियां या कप रिसाइकिल्ड होते हैं, जिन्हें बनाने में बिसफिनोल ए नामक एक जहरीला रसायन इस्तेमाल किया जाता है। अब तक हुए परीक्षणों में यह कैंसरकारक साबित हुआ है। बिसफिनोल ए के अलावा प्लास्टिक को रंगने में इस्तेमाल होने वाले रसायन भी हानिकारक होते हैं। प्लास्टिक के पात्र में गर्म पदार्थ रखा जाए या ठंडा, उसके जहरीले रसायन दोनों ही स्थितियों में उसमें रखे पदार्थ में घुल जाते हैं। एम्स के कम्यूनिटी मेडिसिन विभाग के डॉ. बीर सिंह ने बताया कि सिर्फ पन्नी ही नहीं बल्कि रिसाइकिल किए रंगीन या सफेद प्लास्टिक जार, कप या इस तरह के किसी भी उत्पाद में खाद्य एवं पेय पदार्थ का सेवन जानलेवा हो सकता है। इनमें मौजूद बिसफिनोल ए से महिलाओं में स्तन कैंसर हो सकता है और यह गर्भपात का भी कारण बन सकता है। यह पुरुषों की प्रजनन क्षमता को प्रभावित करता है। एम्स के पूर्व न्यूरो विशेषज्ञ एवं वर्तमान में गुडगांव के आर्टिमिज हिल्स इंस्टीट्यूट में कार्यरत डॉ. प्रवीण गुप्ता कहते हैं कि प्लास्टिक के घातक तत्वों के खाद्य एवं तरल पदाथरें के माध्यम से शरीर में जाने पर मस्तिष्क का विकास बाधित होता है। विशेषज्ञों के अनुसार बिसफिनोल ए पैंक्रियाज ग्रंथि में इंसुलिन बनाने वाली कोशिका अल्फा सेल को भी प्रभावित करता है। इंसुलिन ही हमारे शरीर में ग्लूकोज की मात्रा को नियंत्रित करता है और इसकी कार्यप्रणाली प्रभावित होने से डायबिटीज की बीमारी होती है। बिसफिनोल ए हमारे शरीर में हार्मोन बनने की प्रक्रिया को प्रभावित करता है। लखनऊ के सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ प्लास्टिक्स इंजीनियरिंग एंड टेक्नॉलाजी के निदेशक डॉ. विजय कुमार कहते हैं कि प्लास्टिक की पन्नियों का रंग ही इंसान का दुश्मन है। इन्हें रंगने के लिए सस्ते और हानिकारक रंगों का इस्तेमाल किया जाता है। इन पन्नियों में गर्म चाय या खाद्य पदार्थ रखने से रंग, प्लास्टीसाइजर्स (लचीलेपन के लिए) और स्टेबलाइजर (मजबूती के लिए) के रिस कर सामग्री में मिलने का अंदेशा रहता है। पीजीआइ, लखनऊ के गैस्ट्रो मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. जी. चौधरी की चेतावनी है लाल, नीली झिल्लियों में लाई गई चाय कतई न पिएं। इससे पेट सहित कई बीमारियां हो सकती हैं। बच्चों में खतरा अधिक है। उनकी एकाग्रता कम हो सकती है। (नई दिल्ली से ब्रजकिशोर मिश्र और लखनऊ से रूमा सिन्हा की रिपोर्ट)

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