Wednesday, March 2, 2011

भारतीय वैज्ञानिकों ने विकसित किया चिकनगुनिया के इलाज का टीका!


डेंगू, मेनिंगोकोकल के इलाज में भी होगा कारगर
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद(आईसीएमआर) एवं अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान(एम्स) के शरीर क्रिया विज्ञान व माइक्रोबायोलोजी विभाग के वैज्ञानिकों ने डेंगू, मेनिंगोकोकल एवं चिकनगुनिया के इलाज की दिशा में एक कदम और आगे बढ़ने में सफलता हासिल की है। वैज्ञानिकों ने जहर फैलाने वाले मच्छरों के वायरस (विषाणु) से ऐसी एंटीबाडी कोशिका विकसित की है, जो बुखार व शरीर के अंगों को प्रभावित करने वाली समस्या को दूर करने में सक्षम होगी। दोनों संस्थानों के 12 वैज्ञानिकों द्वारा खोजे गए एंटी वायरस का नाम है वायरस वन। दल के अनुसार इस टीके की खोज इन मच्छरों के एंटीबॉडी प्लस व माइनस सक्रियता का मिलान कर की गई है। प्रयोगशाला में इसके परीक्षण के बाद एंटीबाडीज सीरम तैयार किया गया। मेडिकेटिड करने के बाद पुन: इसकी जांच की तो यह असरदार पाया गया। आईसीएमआर के महानिदेशक डा. वीएम कटोच के अनुसार, यह दोनों एंटीबॉडीज एक ही कोशिका से विकसित की गई हैं। दोनों एंटीबॉडीज विभिन्न किस्मों के चिकनगुनिया को ठीक कर सकती हैं। चिकनगुनिया के कारण डेंगू जैसे लक्षण सामने आते हैं, जो दस दिनों तक बने रहते हैं। इसके कारण होने वाला जोड़ों का दर्द कई हफ्तों या महीनों तक बना रहता है। एंटीबॉडीज के असर का विश्लेषण जल्द ही मनुष्य पर तीसरे फेज में शुरू किए जाने की योजना है। श्री कटोच ने कहा कि हमें उम्मीद है कि इससे सकारात्मक रूप से रोगियों को राहत मिलेगी।अभी इस रोग की उत्पत्ति के बाद रोगी के शरीर की जिस तरह से रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होती है, उसे सामान्य करने में कम से कम 10 दिन व अधिक से अधिक छह माह लगते हैं। चिकनगुनिया, डेंगू का असर सामान्य तौर पर जून से लेकर अक्टूबर नवम्बर तक रहता है। हर साल काफी संख्या में लोग प्रभावित होते हैं। कई लोगों की जान भी जा चुकी है। एम्स के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक ने भरोसा जताया कि अब तक किए गए शोधों के सकारात्मक परिणाम मिले हैं, इसका परीक्षण हम स्पेन व कोरिया मेडिकल कॉलेज के वैज्ञानिकों के यहां भी करा रहे हैं। चिकनगुनिया एडीज प्रजाति के मच्छरों के काटने से फैलता है जो कि एक अत्यंत घातक रोग है। विषैले डंक का प्रभाव रोगी के शरीर में ेत व लाल रक्त कणिकाओं को कार्य करने की प्रक्रिया को तेजी से प्रभावित कर देता है, जिससे रोगी के शरीर में खून बनना बंद हो जाता है। समय रहते यदि इलाज न किया जाए तो रोगी की सप्ताह से दस दिन में मृत्यु भी हो सकती है। यही हाल डेंगू व मेनिंगोकोकल बुखार से पीड़ित व्यक्ति का होता है। खास: एंटी बॉडी डोज देने के बाद रोगी की रोग प्रतिरोधक क्षमता न सिर्फ जल्दी सामान्य होगी बल्कि वे मच्छरों के डंक को भी बेअसर कर सकेंगे। अभी इस बात पर अध्ययन होगा कि क्या यह टीका मच्छर जनित क्षेत्र के वंशिदों के लिए अनिवार्य किया जाए या फिर शुरुआती लक्षण पाए जाने पर ही लगाया जाय।


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