गुटखे की पुडि़या पर जल्दी ही एक और फंदा कसने वाला है। सरकार चाहती है कि यह इतने छोटे पैकेट में न आए कि खाने वाले को इस पर छपी चेतावनी ही साफ न दिखाई दे। पुडि़या हाथ में आए तो उसके घातक परिणामों की तस्वीर ग्राहक की नजरों में जरूर नाच जाए। यह सुनिश्चित करने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय गुटखा, तंबाकू और पान मसाले की पुडि़या का न्यूनतम आकार तय करने की तैयारी में है। इतना ही नहीं, गुटखा और बीड़ी-सिगरेट सहित सभी तंबाकू उत्पादों के साथ ही अब इन्हें बेचने वाली दुकानों पर भी सचित्र चेतावनी लगाई जा सकती है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय इन दिनों तंबाकू उत्पादों के खतरे के बारे में लोगों को सजग करने के लिए इन दो अहम उपायों पर विचार कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक दोनों ही प्रस्ताव खुद स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद की ओर से आए हैं। अभी बहुत सी गुटखे की पुडि़या इतनी छोटी होती है कि उस पर छपी सचित्र चेतावनी दिखाई ही नहीं देती। इसलिए जरूरी है कि चाहे सामग्री कितनी भी हो, उसकी पुडि़या के लिए न्यूनतम आकार तय होना चाहिए। दूसरा प्रस्ताव है कि सिगरेट-गुटखों के तलबगारों को सिगरेट के पैकेट या गुटखे की पुडि़या ही नहीं बल्कि धूम्रपान की दुकानें भी दूर से ही डराएं। तंबाकू के तलबगार जैसे ही दुकानों का रुख करें तो कैंसर की विभीषिका दर्शाते चित्र उनका प्रमुखता से इस्तकबाल करें। इसके लिए तंबाकू उत्पादों पर छपने वाली सचित्र चेतावनी के अलावा जरूरत होने पर अलग से पोस्टर छपवाए जाएं। अभी तंबाकू उत्पाद बेचने वाली दुकानों पर एक वैधानिक चेतावनी तो छपी होती है, लेकिन इसमें सिर्फ यही होता है कि वहां 18 साल से कम उम्र के लोगों को तंबाकू उत्पाद नहीं बेचे जाते। तंबाकू उत्पादों को लेकर हाल ही में हुई एक बैठक में आजाद ने मंत्रालय के अधिकारियों से पूछा है कि वे बताएं कि क्या ये दोनों कदम लागू किए जा सकते हैं। आजाद ने निर्देश दिए हैं कि इसे लागू करने से पहले यह भी देखा जाए कि इन कदमों से लोगों को तंबाकू के खतरे के बारे में जागरुकता लाने की दिशा में कितना लाभ मिलेगा? क्या इन कदमों को लागू किया जाना व्यवहारिक होगा? उद्योग जगत पर इसका क्या असर होगा? साथ ही इसको ले कर किन नियमों में बदलाव करना होगा|
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