माचिस की डिब्बी के आकार का यह यंत्र त्वचा के नीचे और उदर के ऊपर प्रतिरोपित किया जाता है यह उपकरण उदर की मांसपेशियों में उत्तेजना पैदा करता है। इससे शरीर अधिक मात्रा में इंसुलिन स्रवित करता है
वैज्ञानिकों ने 'पेसमेकर' जैसा एक यंत्र बनाया है जो पेट में बिजली के हल्के कंपन देकर 'टाइप-2' मधुमेह के रोगियों के इलाज में मदद करेगा। इस तरह के विद्युत कंपन में किसी तरह का दर्द भी नहीं होगा। 'डेली मेल' की खबर के अनुसार माचिस की डिब्बी के आकार का यह यंत्र त्वचा के नीचे और उदर के ऊपर प्रतिरोपित किया जाता है। खाते समय यह पेट की मांसपेशियों में उत्तेजना पैदा करेगा जिससे शरीर अधिक मात्रा में इंसुलिन जारी करेगा। गौरतलब है कि इंसुलिन ही शरीर में चीनी की मात्रा को नियंत्रित करने का काम करता है और इसी की कमी से मधुमेह की बीमारी होती है। इस उपकरण को लेकर डायमंड (डायबिटीज इमप्रूवमेंट एंड मेटाबॉलिक नॉर्मलाइजेशन डिवाइस) नाम दिया गया है। इस उपकरण लेकर अब तक हुए अध्ययन और परीक्षण में पाया गया कि इससे डायबिटीज-2 के ज्यादा वजन वाले मरीजों में लंबे समय तक रक्त शर्करा नियंतण्रमें रही। यंत्र को 'मेटाक्योर' नाम की स्वास्थ्य यंत्र बनाने वाली कंपनी ने बनाया है। इस यंत्र की सबसे बड़ी खासियत यह है कि जब मरीज खाना खा रहा होता है तो इसे इस बात का अपने आप पता चल जाता है और इसी समय वह बिना कोई दर्द पैदा किए उदर की मांसपेशियों में वैद्युत कंपन शुरू कर देता है। इस प्रक्रिया में मस्तिष्क को ऐसा अहसास होता है कि जितना भोजन व्यक्ति ने वास्तव में खाया है, उससे ज्यादा पेट में पहुंच चुका है। ऐसे में मरीज को पेट भरे होने की अनुभूति होती है। इस डिवाइस को रिमोट कंट्रोल से भी संचालित किया जा सकता है जिसके कारण कुछ-कुछ समय बाद डॉक्टर विद्युत तरंगों को रोगी की जरूरत के अनुसार बढ़ा और घटा सकते हैं। रोगी अपने पेट के ऊपर एक चार्जर को 45 मिनटों के लिए रख कर इस यंत्र को एक हफ्ते के लिए चार्ज भी कर सकते हैं। वियना (आस्ट्रिया) की मेडिकल यूनिवर्सिटी में हुए एक परीक्षण में तीन महीने के भीतर टाइप 2 मधुमेह के मरीजों की रक्त शर्करा में एक चौथाई से भी ज्यादा गिरावट दर्ज की गई। इससे न सिर्फ रक्त शर्करा के स्तर में गिरावट आई बल्कि एक साल के भीतर पांच किलो वजन भी घट गया। यूरोप और अमेरिका में इस उपकरण को लेकर बड़े स्तर पर परीक्षण चल रहे हैं। इस समय 200 लोगों में इस उपकरण को प्रतिरोपित किया गया है। भविष्य में मधुमेह के इलाज में इसे बेहद कारगर तरीका माना जा रहा है।
बेहद महत्वपूर्ण जानकारी
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