लोस से वित्त विधेयक पारित ब्रांडेड परिधान निर्माताओं पर उत्पाद शुल्क अनिवार्य करने के प्रस्ताव में भी दी गई रियायत
वातानुकूलित निजी अस्पतालों और चिकित्सा लैबोरेटरीज पर पांच प्रतिशत सेवाकर लगाने के प्रस्ताव को मंगलवार को वापस ले लिया गया। वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने चौतरफा उठी मांग को स्वीकार करते हुए यह कदम उठाया। इसके अतिरिक्त उन्होंने ब्रांडेड परिधान निर्माताओं पर उत्पाद शुल्क अनिवार्य करने के प्रस्ताव में भी कुछ रियायत दी है। इसके बाद लोकसभा ने वित्त विधेयक 2011 पारित करने के साथ ही 2011- 12 के आम बजट को मंजूरी दे दी। लोकसभा में मंगलवार को वित्त विधेयक 2011 पेश करते हुए वित्त मंत्री ने कहा, 'स्वास्थ्य क्षेत्र पर प्रस्तावित नया सेवाकर केवल राजस्व वसूली के लिए नहीं लगाया गया था बल्कि इसका उद्देश्य वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) की दिशा में आगे बढ़ना था।' वित्त मंत्री की घोषणा का सदस्यों ने मेजें थपथपाकर स्वागत किया। वित्त मंत्री के इन दोनों बजट प्रस्तावों पर हर खासोआम ने तीखी प्रतिक्रि या जताई थी। 28 फरवरी को वित्त वर्ष 2011-12 का आम बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री ने पूरी तरह वातानुकूलित 25 बिस्तर अथवा इससे अधिक क्षमता वाले निजी अस्पतालों और बीमारी की जांच करने वाली शोधशालाओं की सेवाओं पर 50 प्रतिशत छूट के साथ सेवाकर लगा दिया था। इस लिहाज से इन सेवाओं पर 10 प्रतिशत के बजाय सेवा कर की प्रभावी दर पांच प्रतिशत ही होती। मुखर्जी ने इसके अलावा ब्रांडनाम के तहत बिकने वाले सिलसिलाये कपड़ों और मेडअप्स पर भी 10 प्रतिशत की दर से अनिवार्य उत्पाद शुल्क लगाने की घोषणा की थी। इसमें कहा गया था कि उत्पाद शुल्क ऐसे कपड़ों के खुदरा मूल्य के 60 प्रतिशत पर वसूला जाएगा। स्वास्थ्य एवं ब्रांडेड परिधान उद्योग ने इस कर को 'विपदा' कर बताया। वित्त मंत्री ने इसमें फेरबदल करते हुए ब्रांडेड कपड़ों के खुदरा मूल्य के 60 प्रतिशत के स्थान पर अब केवल 45 प्रतिशत मूल्य पर ही उत्पाद शुल्क लगाने की घोषणा की है। उन्होंने कहा, 'ब्रांडेड कपड़ा निर्माताओं की इस चिंता को दूर करने के लिए, मैं उत्पाद शुल्क रियायत को खुदरा मूल्य के पहले के 40 प्रतिशत से बढ़ाकर 55 प्रतिशत करने का प्रस्ताव करता हूं, इस रियायत के साथ ही ऐसी कपड़ा इकाइयां 2011-12 में भी लघु उद्योग मानकों को प्राप्त रियायत के लिए पात्र बनी रहेंगी, चाहे चालू वित्त वर्ष में उनकी खुदरा मूल्य पर बिक्री 8.9 करोड रुपए तक ही क्यों नहीं हो। वित्त मंत्री ने हालांकि, विशेष आर्थिक क्षेत्र (सेज) डेवलपर्स और सेज स्थित इकाइयों के मामले में अपने प्रस्तावों में कोई फेरबदल नहीं किया। बजट में इन्हें न्यूनतम वैकल्पिक कर (मैट) से मिली छूट समाप्त करने का प्रस्ताव है। यह प्रस्ताव एक अप्रैल 2012 से प्रभावी होगा। वित्त मंत्री ने सेज डेवलपर्स को लाभांश वितरण कर से मिली छूट को भी समाप्त करने का प्रस्ताव किया है। आयकर अधिनियम और सेज कानून दोनों में संशोधन कर इस छूट को एक जून 2011 से समाप्त किया जाएगा। कच्चे रेशम के आयात पर बेसिक कस्टम् ड्यूटी को 35 से घटाकर 5 प्रतिशत करने के बजट प्रस्ताव पर वित्त मंत्री ने कहा कि इसके पीछे उद्देश्य हथकरघा और पावरलूम दोनों क्षेत्रों में बुनकरों के लिए कच्चेमाल की आपूर्ति को बढ़ाना है। मुखर्जी ने कहा कि उन्हें क्षेत्र के बारे में अलग अलग प्रतिक्रि याएं मिली हैं। 'मैं सदन को आश्वस्त करना चाहता हूं कि जब कभी जरूरत होगी प्रतिकूल प्रभाव को दूर करने के लिए कदम उठाए जाएंगे।'
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