Thursday, March 17, 2011

स्विच, जो करेगा मधुमेह को ऑफ


वैज्ञानिकों ने इंसुलिन स्राव के लिए जिम्मेदार एक मॉलीक्यूलर स्विच खोजने में सफलता हासिल की है। यह हॉर्मोन रक्त में शर्करा को नियंत्रित करता है। वैज्ञानिकों का दावा है कि यह खोज जल्द ही टाइप-2 मुधमेह के बेहतर इलाज का रास्ता प्रशस्त कर सकेगी। जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के शोध दल ने दावा किया है कि उनके शोध ने लंबे समय से बने रहस्य को सुलझा लिया है और उनकी खोज पहली बार इंसुलिन के स्राव की प्रक्रिया का विवरण उपलब्ध कराएगी। सेल मेटाबॉलिज्म जर्नल में यह शोध प्रकाशित किया गया है। मुख्य शोधकर्ता महबूब हुसैन ने बताया कि टाइप-2 मधुमेह के मामले में आइलेट ऑफ लैंगरहेंस (अग्नाशय का वह हिस्सा जिसमें हार्मोन बनाने वाली कोशिकाएं रहती हैं) में इंसुलिन बनाने वाली बीटा कोशिकाएं कैसे असफल हो जाती हैं, हमारी खोज से पहले यह प्रक्रिया पूरी तरह से समझ से बाहर थी। इस कारण नए और बेहतर इलाज ढूढ़ने में दिक्कतें आ रही थीं। हमारे शोध ने दशकों पुरानी पहेली को सुलझाया है। भोजन ग्रहण करने के बाद, अग्नाशय इंसुलिन का उत्पादन करता है। यह रक्त में मौजूद ग्लूकोज को शरीर की हर कोशिका तक पहुंचाता है। टाइप-2 मधुमेह से पीडि़त रोगियों में या तो पर्याप्त इंसुलिन स्रावित नहीं होता है या इनकी कोशिकाएं इसके प्रभाव का प्रतिरोध करती हैं। अग्नाशय कैसे इंसुलिन को स्रावित करता है, अध्ययन में यह बात ज्यादा शुद्ध रूप से ढूंढ़ने की कोशिश की गई है। शोध दल ने देखा कि शरीर में अन्य कोशिकाएं रसायनों को कैसे स्रावित करती हैं। तंत्रिका कोशिकाओं में पाया गया एक खास प्रोटीन स्नेपिन पीडि़त की आंखों में पाया गया क्योंकि तंत्रिका कोशिकाओं द्वारा इनका इस्तेमाल रसायन के रिसाव के लिए किया जाता है, जो कोशिकाओं के संचार के लिए आवश्यक होता है। स्नेपिन अग्नाशन की बीटा कोशिकाओं में भी पाया गया है। स्नेपिन की भूमिका जांचने के लिए, शोधकर्ताओं ने चूहे में स्नेपिन जीन में बदलाव कर दिए ताकि अग्नाशय में स्नेपिन निरंतर सक्रिय रहे। उन्होंने अग्नाशय कोशिकाओं को अलग कर लिया और इनका बर्तन में विकास किया। इसके बाद उन्होंने कोशिकाओं में ग्लुकोज को डाला और स्रावित होने वाले इंसुलिन की मात्रा नापने के लिए नमूने ले लिए। जब वैज्ञानिकों ने सामान्य चूहे में अग्नाशय कोशिकाओं द्वारा स्रावित इंसुलिन से इन आंकड़ों की तुलना की, तो उन्होंने पाया कि सामान्य चूहे में प्रति कोशिका एक ग्राम का करीब 2.8 अरबवां हिस्सा इंसुलिन स्रावित हुआ जबकि सक्रिय स्नेपिन वाले चूहों की कोशिकाओं से 7.3 अरबवां हिस्सा स्रावित हुआ। यह सामान्य से करीब तीन गुना ज्यादा स्राव था। हुसैन ने कहा, हम यह जानकर चकित थे कि चूहे में स्नेपिन के पास ज्यादा या बड़ी अग्नाशय कोशिकाएं नहीं थीं, उन्हें प्राकृतिक तौर पर ज्यादा इंसुलिन बनाया। इसका मतलब यह हुआ कि हमारी सभी इंसुलिन स्रावित करने वाली कोशिकाओं के पास इंसुलिन का काफी बड़ा भंडार होता है जिसके बारे में हम नहीं जानते थे और इसे नियंत्रित करने वाली स्विच के बारे में भी।

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