Friday, March 11, 2011

अब नहीं पड़ेगी मीठे की मार


मोटापे के बावजूद अगर आप मीठे का मोह नहीं छोड़ पा रहे हैं तो नई खोज आपके लिए वरदान साबित हो सकती है। वैज्ञानिकों ने एक ऐसी युक्ति तलाशने का दावा किया है जो हमारी स्वादेन्दि्रयों (टेस्ट बड्स) को कुछ शांत कर देगी। इससे उच्च कैलोरी वाले भोजन के प्रति हमारी लालसा कम हो जाएगी। एक अंतरराष्ट्रीय दल ने जीभ में दो संसूचकों की खोज की है जो मीठे का पता लगाने में शरीर की मदद करते हैं। डेली मेल की खबर के मुताबिक, फिलेडेल्फिया में मोनेल कैमिकल सेंसेस सेंटर की अगुवाई में वैज्ञानिकों ने पाया कि मीठे की पहचान करने वाली जीभ की स्वादेन्दि्रयों में तीन विभिन्न शुगर रिसेप्टर होते हैं। पूर्व में इनकी संख्या सिर्फ एक ही मानी जाती रही है। आंत और अग्नाशय में भी रिसेप्टर पाये जाते हैं जो रक्त में ग्लूकोज के स्तर पर निगरानी रखने और इंसुलिन को स्रावित करने में मदद करते हैं। जीभ के इन तीनों रिसेप्टर में से एक को केएटीपी कहा जाता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह शरीर की जरूरत के हिसाब से मीठे स्वाद की संवेदनशीलता को अनुकूल बनाने में मदद कर सकता है। उदाहरण के लिए, केक या आइसक्रीम खाने के तुरंत बाद यह कम हो सकती है या मेटाबॉलिज्म को ज्यादा मीठे की जरूरत है तो बढ़ सकती है। शोध दल के मुखिया डॉ. कारेन यी ने कहा कि यह जानकारी एक दिन हमें यह समझने में मदद कर सकती है कि मीठे भोजन के अतिरिक्त उपभोग को कैसे सीमित किया जाए। चूहों की कोशिकाओं पर किया गया यह अध्ययन प्रोसिडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज जर्नल के ताजा अंक में प्रकाशित किया गया है।


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