महंगे इलाज से कराह रहे लोगों का बीमारियों पर खर्च और बढ़ जाएगा। किसी भी तरह की पैथोलॉजिकल जांच करवाने पर अब मरीज को पांच फीसदी का सेवा कर देना होगा। इसी तरह 25 से ज्यादा बिस्तर वाले प्राइवेट अस्पतालों में इलाज करवाने पर भी सरकार इतना ही कर वसूलेगी। हालांकि स्वास्थ्य क्षेत्र में सरकारी सुविधाओं को मजबूती देने के प्रयास भी बजट में किए गए हैं। वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने स्वास्थ्य क्षेत्र पर केंद्र के खर्च को 20 फीसदी बढ़ाकर इसे 26,700 करोड़ रुपये करने का एलान किया है। इसका फायदा खास तौर पर राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) को हो सकेगा, लेकिन सभी तरह की पैथोलॉजिकल जांच को सेवा कर के दायरे में लाए जाने से आम लोगों की जेब पर पड़ने वाला बोझ बढ़ जाएगा। डॉ. लाल पैथ लैब के सीएमडी अरविंद लाल कहते हैं कि आधुनिक चिकित्सा में 70 फीसदी फैसले इन जांच के आधार पर ही लिए जाते हैं। ऐसे में यह कदम बिल्कुल निराशाजनक है। इसी तरह सरकारी अस्पतालों में जगह की कमी को देखते हुए गंभीर बीमारियों के मरीजों को भी प्राइवेट अस्पतालों में ही जाना होता है। ऐसे में यहां लगाए गए पांच फीसदी सेवा कर का बोझ भी आम लोगों पर पड़ेगा। जीएम मोदी अस्पताल के निदेशक डॉ. विनय लजारुज कहते हैं कि स्वास्थ्य क्षेत्र को तो आइटी की तरह ढांचागत क्षेत्र घोषित कर इसे बढ़ावा देना चाहिए था। खास कर कैंसर जैसी बीमारियों के मरीजों के लिए तो यह और जानलेवा साबित होगा|
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