Wednesday, February 9, 2011

पंजाब: 35 फीसदी ग्रामीण हाईपरटेंशन के रोगी


अब पंजाब के गांवों में भी सुकून नहीं रहा। शारीरिक श्रम की कमी और नशे के अत्यधिक सेवन के कारण राज्य 35 फीसदी ग्रामीण शहरी बीमारी यानी हाईपरटेंशन की चपेट में हैं। इसके चलते उनके हार्ट, किडनी व ब्रेन को भी खतरा पैदा हो गया है। राज्य सरकार के सहयोग से मालवा क्षेत्र के तीन जिलों बठिंडा, मानसा व श्री मुक्तसर साहिब के गांवों में मरीजों को स्वास्थ्य सहूलियत मुहैया करवा रही रेनबेक्सी संजीवनी स्वास्थ्य सेवा की रिपोर्ट से यह खुलासा हुआ है। रेनबेक्सी की आठ मोबाइल मेडिकल यूनिट मालवा के तीन जिलों में चल रही हैं। जुलाई से दिसंबर, 2010 तक उनकी टीमों ने 49,411 मरीजों की जांच की। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन इलाकों में 35 फीसदी ग्रामीण हाईपरटेंशन से ग्रस्त हैं जिनमें हर आयु वर्ग के मरीज शामिल हैं। ध्यान रहे कि मशीनों के इस युग में फिजिकल वर्क तो पहले ही घट चुका है, ऐसे में पंजाबी किसान खेतों में खुद काम करने के बजाय बाहरी प्रदेशों से आए मजदूरों का सहारा लेता है। चूंकि ग्रामीण क्षेत्रों की डाइट या खान-पान काफी हैवी होता है। दूध, घी, मक्खन, नमक खूब खाया जाता है। कोई शारीरिक कार्य न करने की वजह से यह आसानी से हजम नहीं होता। इसके ऊपर ग्रामीण क्षेत्रों में शराब का भी खूब सेवन होता है। सिविल अस्पताल के डा. परमिंद्र बंसल कहते हैं कि हाईपरटेंशन में ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है। इससे ब्रेन हेमरेज या अधरंग की नौबत आ जाती है। हाईपरटेंशन अनियंत्रित होने पर हार्ट अटैक व हार्ट फेल होने का खतरा बना रहता है। किडनी पर भी बुरा असर पड़ने के साथ हाथ-पैरों की नाडि़यों में झनझनाहट होने लगती है। कई बार स्थिति मरीज की मौत तक पहुंच जाती है। रेनबेक्सी संजीवनी स्वास्थ्य सेवा के प्रोजेक्ट मैनेजर डा. इंदुभूषण अग्रवाल कहते हैं कि हाईपरटेंशन से बचाव के लिए वजन नियंत्रित होना चाहिए। फिजिकल एक्टीविटी के साथ एक्सरसाइज बहुत जरुरी है। ज्यादा नमक व शराब से परहेज जरुरी है। डाइट संतुलित होनी चाहिए।


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