Thursday, February 24, 2011

सिगरेट-बीड़ी में तय होगा नशा


 हिंदुस्तान में धूम्रपान करने वालों को पता ही नहीं कि जो धुआं वे पी रहे हैं उसमें जहरीले तत्वों की मात्रा कितनी है। लेकिन अब दूसरे मुल्कों की तरह हमारे देश में भी बीड़ी-सिगरेट में निकोटीन व टार की अधिकतम मात्रा तय होने वाली है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय इस संबंध में जल्दी ही नियम बनाने जा रहा है। साथ ही इनकी जांच के लिए देश भर में छह प्रयोगशालाएं भी बन रही हैं। निर्धारित मात्रा का उल्लंघन करने वाले निर्माता पर सख्त जुर्माने का भी प्रावधान किया जा रहा है। इस समय मदिरा पीने वालों को तो पता होता है कि उनकी शराब या बीयर में अल्कोहल कितने फीसदी है। इन बोतलों पर इस बारे में साफ जानकारी भी छपी होती है। अब स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से बनाए जा रहे नए नियमों के तहत बीड़ी-सिगरेट में भी निकोटीन और टार की मात्रा तय होगी। साथ ही इसकी जानकारी पैकिंग पर भी देनी होगी। स्वास्थ्य मंत्रालय के वरिष्ठ सूत्रों के मुताबिक नए नियमों को लागू करने से पहले देश के विभिन्न हिस्सों में छह तंबाकू जांच प्रयोगशालाएं तैयार की जा रही हैं। इनका काम अगले सात -आठ महीने में पूरा हो जाने की उम्मीद है। इनमें से पांच प्रयोगशालाएं चंडीगढ़, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता और गाजियाबाद में होंगी, जबकि इस क्षेत्र की सर्वोच्च लैब राष्ट्रीय जीव विज्ञान प्रयोगशाला (एनआईबी), नोएडा के तहत काम करेगी। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक अगले चरण में चबाने वाले तंबाकू उत्पादों के लिए भी ऐसा ही पैमाना तय किया जाएगा। इस समय जहां दुनिया के अधिकांश मुल्कों में टार और निकोटीन की अधिकतम मात्रा प्रति सिगरेट दस एमजी और एक एमजी निर्धारित है। लेकिन हिंदुस्तान में ऐसा कोई मानक तय नहीं होने की वजह से अधिकांश उत्पादों में यह मात्रा इससे काफी अधिक पाई जा रही है। इस समय कृषि मंत्रालय के तहत चलने वाले केंद्रीय तंबाकू शोध संस्थान (सीटीआरआई), राजमुंदरी में इस जांच की व्यवस्था है। लेकिन यह सुविधा बहुत सीमित है और बड़े पैमाने पर ऐसे नमूनों की जांच के लिए सक्षम नहीं|

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