वैज्ञानिक एक ऐसी पट्टी विकसित करने में लगे हैं जो युद्धक्षेत्र में सैनिकों के शरीर से बहते खून को तुरंत रोककर जख्म को भरने में मदद करेगी। यह एक प्रकार की रासायनिक पट्टी होगी। एडिनबर्ग विश्वविद्यालय का एक दल इस पट्टी को विकसित कर रहा है। इस दल ने प्लास्टिक के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले पॉलीमर अणुओं के एक समूह को खोज लिया है। इससे रक्त की प्लेटलेट से खून का थक्का बनाकर उसे बहने से रोकने वाले गुणों को सक्रिय करने में मदद मिल सकेगी। वैज्ञानिकों का कहना है कि पॉलीमर अणुओं का युद्धक्षेत्र में महत्वपूर्ण इस्तेमाल हो सकता है। उन्हें पट्टी पर छिड़ककर सीधे जख्म पर लगाया जा सकता है ताकि बहते रक्त को रोक देने की प्रक्रिया तुरंत शुरू की जा सके। युद्ध के दौरान सैनिकों के बहते खून को रोकने की एक बड़ी समस्या होती है। रक्त बहने से रक्तचाप और दिल की धड़कन तेज हो जाती हें। इससे मौत की आशंका बढ़ जाती है। युद्ध के दौरान अधिकतर सैनिकों की मौत इसी कारण से होती है। मगर नई रासायनिक पट्टी से मौत की आशंका को कम किया जा सकता है। ब्रिटिश अखबार, द स्कॉट्समैन में प्रकाशित खबर के अनुसार, पॉलीमर का आम जीवन में भी व्यापक इस्तेमाल किया जा सकता है। सड़क या किसी अन्य दुर्घटना के दौरान बहने वाले खून को रोकने के लिए प्राथमिक उपचार के तौर पर यह अत्यंत कारगर साबित होगा। शीर्ष वैज्ञानिक प्रोफेसर मार्क ब्राडले ने कहा कि इन पॉलीमरों का सैनिक और असैनिक चिकित्सा कार्यो में बहुत बड़ा लाभ मिल सकता है। चूंकि यह घायल मरीजों की यही स्थिति सड़क हादसों और अन्य दुर्घटनाओं में भी होती है। कई दफा खून अधिक बह जाने से उन्हें समय रहते उचित इलाज नहीं दिया जा पाता और वह मर जाते हैं। उन्होंने बताया कि इन पॉलीमर को पट्टी के ऊपर बिछाया जा सकता है। वह एक किस्म के प्लास्टर की तरह काम करेगी। कटे हुए स्थान पर इस लेप के कारण खून के थक्के बनने लगते हैं और वहीं जम जाता है। इससे रक्तस्राव तुरंत रुक जाता है। इससे आगे चलकर वैज्ञानिकों को रक्त संबंधी अन्य बीमारियों में भी मदद मिलने की उम्मीद है। वैज्ञानिकों ने इस पॉलीमर पट्टी को तैयार करने के लिए इंकजेट प्रिंटर की तकनीक का इस्तेमाल किया। प्रिंटर की लीड भी इसी प्रकार स्याही को आवश्यकतानुसार सोख लेती है। ताकि छपाई स्पष्ट हो सके।
Thursday, February 3, 2011
पट्टी बनेगी मलहम
वैज्ञानिक एक ऐसी पट्टी विकसित करने में लगे हैं जो युद्धक्षेत्र में सैनिकों के शरीर से बहते खून को तुरंत रोककर जख्म को भरने में मदद करेगी। यह एक प्रकार की रासायनिक पट्टी होगी। एडिनबर्ग विश्वविद्यालय का एक दल इस पट्टी को विकसित कर रहा है। इस दल ने प्लास्टिक के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले पॉलीमर अणुओं के एक समूह को खोज लिया है। इससे रक्त की प्लेटलेट से खून का थक्का बनाकर उसे बहने से रोकने वाले गुणों को सक्रिय करने में मदद मिल सकेगी। वैज्ञानिकों का कहना है कि पॉलीमर अणुओं का युद्धक्षेत्र में महत्वपूर्ण इस्तेमाल हो सकता है। उन्हें पट्टी पर छिड़ककर सीधे जख्म पर लगाया जा सकता है ताकि बहते रक्त को रोक देने की प्रक्रिया तुरंत शुरू की जा सके। युद्ध के दौरान सैनिकों के बहते खून को रोकने की एक बड़ी समस्या होती है। रक्त बहने से रक्तचाप और दिल की धड़कन तेज हो जाती हें। इससे मौत की आशंका बढ़ जाती है। युद्ध के दौरान अधिकतर सैनिकों की मौत इसी कारण से होती है। मगर नई रासायनिक पट्टी से मौत की आशंका को कम किया जा सकता है। ब्रिटिश अखबार, द स्कॉट्समैन में प्रकाशित खबर के अनुसार, पॉलीमर का आम जीवन में भी व्यापक इस्तेमाल किया जा सकता है। सड़क या किसी अन्य दुर्घटना के दौरान बहने वाले खून को रोकने के लिए प्राथमिक उपचार के तौर पर यह अत्यंत कारगर साबित होगा। शीर्ष वैज्ञानिक प्रोफेसर मार्क ब्राडले ने कहा कि इन पॉलीमरों का सैनिक और असैनिक चिकित्सा कार्यो में बहुत बड़ा लाभ मिल सकता है। चूंकि यह घायल मरीजों की यही स्थिति सड़क हादसों और अन्य दुर्घटनाओं में भी होती है। कई दफा खून अधिक बह जाने से उन्हें समय रहते उचित इलाज नहीं दिया जा पाता और वह मर जाते हैं। उन्होंने बताया कि इन पॉलीमर को पट्टी के ऊपर बिछाया जा सकता है। वह एक किस्म के प्लास्टर की तरह काम करेगी। कटे हुए स्थान पर इस लेप के कारण खून के थक्के बनने लगते हैं और वहीं जम जाता है। इससे रक्तस्राव तुरंत रुक जाता है। इससे आगे चलकर वैज्ञानिकों को रक्त संबंधी अन्य बीमारियों में भी मदद मिलने की उम्मीद है। वैज्ञानिकों ने इस पॉलीमर पट्टी को तैयार करने के लिए इंकजेट प्रिंटर की तकनीक का इस्तेमाल किया। प्रिंटर की लीड भी इसी प्रकार स्याही को आवश्यकतानुसार सोख लेती है। ताकि छपाई स्पष्ट हो सके।
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment