Wednesday, February 23, 2011

झारखंड: फिर जगा पोलियो वायरस


झारखंड ने शिशु मृत्यु दर कम करने में सफलता भले ही प्राप्त कर ली हो, पोलियो के सात नए मामलों ने राज्य, केंद्र सरकार के साथ ही डब्ल्यूएचओ व यूनिसेफ को आश्चर्य में डाल दिया है। राष्ट्रीय स्तर पर पोलियो मरीजों में 94 फीसदी की कमी के बीच नए रोगियों का मिलना चौंकाने वाला है। झारखंड के काफी समय तक पोलियोमुक्त रहने के बाद 2009 के अक्टूबर-दिसंबर में दो तथा 2010 में सात केस मिले। सभी केस पाकुड़ में मिले। इनमें पी-1 के तीन तथा पी-3 के चार रोगी मिले। 7 मई 2006 के बाद से झारखंड में पोलियो का एक भी मरीज नहीं मिला था। तीन वर्ष पांच महीना व तीन दिन के लंबे गैप के बाद दो केस मिले। 2009 में पहला मरीज 10 अक्टूबर को साहिबगंज में मिला, जबकि दूसरा मरीज 7 दिसंबर को चंदनक्यारी (बोकारो) में। अनुमान है कि साहिबगंज के बिहार तथा पाकुड़ के बंगाल से सटे होने के कारण वायरस का संक्रमण हुआ। इन दोनों राज्यों में पोलियो मरीजों की संख्या अब भी अन्य राज्यों की अपेक्षा अधिक है। प्रदेश में पोलियो के अचानक मिले इन मामलों के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन तथा केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय सजग हो गया है। पाकुड़ में पल्स पोलियो के मॉप राउंड चलाए चलाए जा रहे हैं, वहीं पूरे प्रदेश में पोलियो अभियान फिर से शुरू कर दिया गया है। पहला पल्स पोलियो अभियान 23 जनवरी को पूरे प्रदेश में चलाया गया। अगला अभियान इसी माह 27 तारीख को चलाया जाना है। 28 फरवरी व 1 मार्च को डोर-टू-डोर अभियान चलाए जायेगा। राज्य सरकार की कोशिश होगी कि एक भी बच्चा पल्स पोलियो ड्राप से अछूता नहीं रहे। उल्लेखनीय है कि देश में उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड, राजस्थान, महाराष्ट्र तथा गुजरात पोलियो के हाई रिस्क जोन में हैं। हालांकि केंद्र और राज्य सरकारों के प्रयासों से पोलियो की चपेट में आने वाले मरीजों की संख्या में दिनों दिन कमी हो रही है।


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