Monday, February 28, 2011

सिगरेट-गुटखा के खिलाफ डॉक्टर लामबंद


 देश भर के 16 प्रमुख कैंसर अस्पतालों के डॉक्टरों ने प्रधानमंत्री को पत्र लिख कर गुटखा, खैनी और सिगरेट आदि तंबाकू उत्पादों की बिक्री तुरंत रोकने की अपील की है। इनका कहना है कि अगर तत्काल यह कदम नहीं उठाया गया तो देश में कैंसर के मरीजों का इलाज कर पाना मुमकिन नहीं रह जाएगा। इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान, पटना के निदेशक डॉ. अरुण कुमार कहते हैं, रोजाना लोगों को अपाहिज और उनके परिवार वालों को निराश्रित होता देखता हूं। ऐसे में चुप कैसे रहा जाए। ..मैंने पूरी उम्मीद के साथ यह चिट्ठी लिखी है कि सरकार इस पर कदम उठाएगी। कुमार कहते हैं कि भारत एक प्रजातंत्र है और आज यह जनभावना बहुत मजबूत हुई है। इसलिए सरकार यह कदम उठाने से बच नहीं सकती। क्षेत्रीय कैंसर अस्पताल,अगरतला के चिकित्साधीक्षक डॉ. गौतम मजूमदार इसे उत्तर-पूर्व के राज्यों की सेहत के साथ ही लोक संस्कृति के लिए भी बेहद खतरनाक बताते हैं। उनके मुताबिक, तंबाकू उत्पादों की खुली बिक्री की कतई इजाजत नहीं मिलनी चाहिए। शराब की तरह कम से कम खुले बाजार में तो इसकी बिक्री रोकी ही जा सकती है। गुजरात कैंसर और शोध संस्थान के निदेशक पंकज शाह अपने अस्पताल के रिकार्ड के हवाले से बताते हैं कि दो दशक पहले तक गले का कैंसर सबसे अधिक होता था लेकिन अब गुटखे की वजह से मुंह का कैंसर सबसे ज्यादा हो रहा है। बी बरुआ कैंसर संस्थान, गुवाहाटी के निदेशक डॉ. ए.सी. कटकी कहते हैं कि सिर्फ इस छोटे से प्रदेश में 6.5 लाख पुडि़या गुटखा और 3.2 लाख पैकेट सिगरेट बिक रही है, जो बताता है कि यह लत कितनी खतरनाक हो चुकी है। डॉ. पंकज चतुर्वेदी कहते हैं यह अच्छा है कि हम डॉक्टर, जिनकी पहचान सिगरेट के जुड़ गई थी वो आज तंबाकू के खिलाफ इकट्ठा हो रहे हैं। पीएम और स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिखने वालों में कैंसर के सबसे बड़े अस्पताल टाटा मेमोरियल अस्पताल, मुंबई के निदेशक राजन बडवे के अलावा बीकानेर, अहमदाबाद, रोहतक, नागपुर, कोलकाता, चेन्नई, ग्वालियर, बेंगलूरू, हैदराबाद, रायपुर, कटक और त्रिवेंद्रम के कैंसर अस्पतालों के निदेशक भी शामिल हैं|

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