केरल विधानसभा ने शीतल पेय बनाने वाली कंपनी कोका कोला के प्लाचीमाडा संयंत्र से प्रभावित लोगों को मुआवजा दिलाने के लिए कमर कस ली है। मुआवजे के लिए एक विशेष न्यायाधिकरण गठित करने को लेकर गुरुवार को एक विधेयक पारित किया गया। विशेष न्यायाधिकरण संयंत्र के चलते पैदा हुई सभी समस्याओं और मुआवजे के मसले को निपटाएगा। राज्य सरकार के इस कदम पर कोका कोला ने कहा है कि यह बिल तथ्यों और वैज्ञानिक आंकड़ों पर आधारित नहीं है। शीतल पेय बनाने वाली कंपनी ने कहा है कि वह इस मुद्दे पर अभी भी इससे जुड़े सभी पक्षों के साथ चर्चा करने को तैयार है। इससे पहले, माकपा की अगुवाई वाली एलडीएफ सरकार ने विधानसभा सत्र के अंतिम दिन यह विधेयक पेश किया। विधेयक पेश करने के दौरान सदन में हंगामे का माहौल था क्योंकि कांगे्रस नीत विपक्षी यूडीएफ गठबंधन किसी अन्य मुद्दे पर सदन की कार्यवाही स्थागित करने की मांग पर अड़ा हुआ था। विधेयक एकउच्च स्तरीय समिति की सिफारिशों को ध्यान में रखते हुए पेश किया गया था। समिति ने पाया था कि पलक्कड जिले में हिंदुस्तान कोका कोला बीवरेजेज प्राइवेट (एचसीसीबी) लिमिटेड संयंत्र के चलते 216.16 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचा। समिति ने एक विशेष न्यायाधिकरण गठित किए जाने का सुझाव दिया था, ताकि कंपनी से प्रदूषणकर्ता भरपाई सिद्धांत के आधार पर क्षतिपूर्ति कराई जा सके। विधेयक में कहा गया है कि संयंत्र ने पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया और इसकी वजह से मिट्टी की उपजाऊपन में कमी आई तथा पानी भी प्रदूषित हुआ। सरकार के मुताबिक संयंत्र के चलते अत्यधिक मात्रा में भू जल के दोहन से पेयजल की किल्लत हो गई। कारखाने से निकली कैडमियम, सीसा और क्रोमियम जैसी धातुओं के चलते फसल की पैदावार कम हो गई। संयंत्र की गाद से लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ा। त्वचा रोग तथा सांस लेने में जैसी शिकायतें सामने आईं। कई गैर सरकारी संस्थाओं और संगठनों ने कंपनी के खिलाफ आवाज उठाई और तब कहीं जाकर सरकार का ध्यान इस ओर गया और जांच आदिवासियों के विरोध और भूजल के अत्यधिक दोहन को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई के चलते प्लाचीमाडा संयंत्र पिछले कई साल से बंद है। केरल सरकार ने राज्य में कोका कोला के उत्पादन और बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया था लेकिन उच्च न्यायालय के आदेश के बाद यह प्रतिबंध हटा लिया गया।
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