अगर आप महिला हैं और आपकी मां को पहले दिल का दौरा पड़ चुका हो तो आप पर भी इसका खतरा है। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय की स्ट्रोक प्रीवेंशन रिसर्च यूनिट में भारतीय मूल के वैज्ञानिक अमिताभ बनर्जी की अगुवाई में एक दल ने नए अनुसंधान में यह पाया हैं। दल ने पाया कि आनुवांशिक तौर पर दिल का दौरा पड़ने का जोखिम महिलाओं में कहीं अधिक है जबकि पुरुषों में मद्यपान और धूम्रपान जैसी जीवनशैली से यह जुड़ा है। उसका सुझाव है कि किसी महिला में दिल का दौरा पडने के जोखिम की जांच के दौरान चिकित्सकों को उसके परिवार के इतिहास के बारे में खास जानकारी हासिल करनी चाहिए। मसलन उसके कौन से रिश्तेदार उससे प्रभावित हुए और उनकी क्या उम्र है। डेली मेल के अनुसार मोटापा, उच्च रक्तचाप, अधिक मात्रा में मद्यपान अथवा धूम्रपान की तुलना में यह तथ्य दिल के दौरे का जोखिम बताने में अधिक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। शोधकर्ताओं ने 2200 से अधिक महिला मरीजों पर अध्ययन किया और पाया कि उनमें से अधिकतर के पिता की तुलना में माता को दिल का दौरा पड़ चुका था। यह भी पाया गया कि दिल की समस्या वाली महिलाओं में अधिकतर के भाई की तुलना में बहन को दिल का दौरा पड़ा था। इसी समूह की महिलाओं के एक पहले के अध्ययन में पाया गया कि जिनकी माता को शुरू की उम्र में दिल का दौरा पड़ा था उन्हें 65 साल से पहले इसका खतरा अधिक रहता है। बनर्जी का कहना है कि दिल के दौरे के जोखिम का पता लगाने का वर्तमान माध्यम पारिवारिक इतिहास को अनदेखा करता है अथवा हां या नहीं के सवाल तक सीमित है।
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