विश्व कैंसर जागरुकता दिवस आज
लखनऊ। 22 वर्षीय शमाके एक ही माह में दोबारा मासिक धर्म होने लगा। इस समस्या को लेकर वह क्वीन मेरी अस्पताल की महिला रोग विशेषज्ञ से मिली। उन्होंने शमा को चिविवि के कैंसर विभाग में जाने की सलाह दी। जांच के बाद उसे बताया कि शमा को सर्वाइकल (गर्भाश्य का कैंसर) हो गया है। यह बात जानने के बाद शमा परेशानी हो गई। लेकिन दो साल के इलाज के बाद शमा अब बिल्कुल स्वस्थ्य है। लोहिया इंस्टीट्यूट के निदेशक प्रो. एमसी पंत ने बताया कि साल भर में चिविवि में आने वाले कैंसर के मरीजों में बीस प्रतिशत सर्वाइकल कैंसर के होते है। भारत में खतरनाक बीमारी सर्वाइकल कैंसर से हर 7 मिनट में एक महिला की मौत हो रही है। भारत में महिलाओं के लिए खतरा बनती जा रही है यह बीमारी। यह ऐसी घातक बीमारी है, जो अपनी चपेट में कब ले लेती है पता ही नहीं चलता है और जब पता चलता है तब तक काफी देर हो जाती है। महिलाओं में यह कैंसर तेजी से फैल रहा है। इस बीमारी से सबसे ज्यादा मौतें भारत में हो रही हैं। दुनियाभर में सालाना 5 लाख महिलाओं की मौत गर्भाशय कैंसर की वजह से होती है, जिसमे से एक लाख 74 हजार सिर्फ भारतीय महिलाएं हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक विश्व में एक लाख में 16 महिलाएं हर साल इस रोग से ग्रस्त होती हैं और इनमें से नौ की मौत तय होती है। इस तरह हर साल सर्वाइकल कैंसर से लगभग ढाई लाख महिलाएं काल के गाल में समा जाती हैं। भारत की महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर के बढ़ने की दर 2.4 प्रतिशत है, जबकि विश्व स्तर पर यह आंकड़ा 1.3 प्रतिशत है। बाद के स्टेज में यह पूरे शरीर में फैल जाता है।
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