Thursday, February 3, 2011

चेन्नई में चिकित्सकों ने किया दुर्लभ ऑपरेशन


चेन्नई के डॉक्टरों ने एक दुर्लभ सर्जरी की है। इस ऑपरेशन में तीस साल के एक मरीज की छोटी आंत को बाहर निकालकर उसे चार घंटे तक संरक्षित रखा गया। फिर उसके पेट से एक ट्यूमर निकाला गया और आंत को दोबारा यथास्थान रख दिया गया। इसे देश में आंत का प्रतिरोपण करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। ग्लोबल हॉस्पिटल में जिस मरीज पर यह सर्जरी की गई, उसका नाम नहीं बताया गया है लेकिन वह पश्चिम बंगाल का रहने वाला है। ऑपरेशन के बाद वह अपने घर पर स्वास्थ्य लाभ कर रहा है। लीवर प्रतिरोपण सर्जन डॉ. रेला कहते हैं कि उस मरीज को कई अस्पतालों ने लौटा दिया था। मेडिकल जांच रिपोर्टो से पता चला कि उसके अग्नाशय में एक बहुत बड़ा ट्यूमर है। अग्नाशय से ही इंसुलिन का स्त्राव होता है, जिसकी कमी से मधुमेह की बीमारी होती है। अगर इस ट्यूमर को नहीं हटाया जाता तो उसकी आंत बेकार हो जाती। सर्जरी से जुड़े डॉक्टरों के लिए ट्यूमर को निकालनाचुनौती थी। यह जटिल ऑपरेशन था। जहां ट्यूमर था, वहां नश्तर चलाने की जगह नहीं थी। इसके मद्देनजर टीम ने तय किया कि उसकी छोटी आंत को पहले बाहर निकाला जाएगा और फिर ऑपरेशन को अंजाम दिया जाएगा। उनकी यह कोशिश सफल रही। मरीज के अग्नाशय से टेनिस की गेंद के बराबर का ट्यूमर निकाला गया। क्या इस सर्जरी से हमारे डॉक्टरों को यह भरोसा हो गया है कि वे आंत का प्रतिरोपण भी कर सकते हैं? इस सवाल के जवाब में डॉ. रेला कहते हैं कि अभी वह समय नहीं आया है। आंत के प्रतिरोपण के लिए न सिर्फ चिकित्सकीय कौशल की जरूरत पड़ती है बल्कि सर्जरी के बाद मरीज की देखभाल भी काफी मायने रखती है।


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