केंद्र सरकार ने सेहत पर विपरीत असर डालने तथा बीमारियों की सौगात देने वाली कई दवाओं को बाकायदा कानून बनाकर प्रतिबंधित कर दिया है। इनका निर्माण और बिक्री करना गंभीर जुर्म है,लेकिन उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के बाजारों में यह खुलेआम बिक रही हैं। रोज करोड़ों रुपये की बिलिंग हो रही है। इन दवाओं का प्रयोग गंभीर रोग देता है। आम लोगों की सेहत से बेखबर अफसरों ने अभी तक इनको बाजार से हटाने की कोई कोशिश नहीं की है। विश्व स्वास्थ्य संगठन समेत कई संस्थाओं ने कुछ सॉल्ट से बनने वाली दवाओं के गंभीर दुष्परिणामों से जुड़ी रिपोर्ट केंद्र को भेजी थी। दोबारा जांच में दवाओं के साइड इफेक्ट की पुष्टि होने पर केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने बीती 10 फरवरी को भारत के राजपत्र में अधिसूचना प्रकाशित कर 12 वर्ष की आयु से नीचे के बच्चों में निमेसुलाइड फार्मुलेशन के अलावा फेनाइलप्रोपेनोलेमाइन, सीसाप्राइड, सिबुट्रामाइन, आर-सिबुट्रामाइन और ह्यूमन प्लेसेंटल एक्स्ट्रेक्ट और इनके फार्मुलेशन के बनने वाली दवाओं के निर्माण, बिक्त्री और वितरण पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। इसके बाद से इन दवाओं का व्यापार गैर कानूनी हो गया लेकिन बाजार में यह धड़ल्ले से बिक रही हैं। लखनऊ केमिस्ट एसोसिएशन के वाइस प्रेसीडेंट हरीश शाह बताते हैं, उक्त दवाएं प्रचलन में हैं। खासकर निमेसुलाइड फार्मुलेशन वाले बच्चों के सिरप। राज्य में केवल इसी दवा का कुल कारोबार सौ करोड़ रुपये सालाना से अधिक है। इस बारे में खाद्य एवं औषधि प्रशासन एफडीए विभाग ने दुकानदारों व कंपनियों को कोई नोटिस जारी नहीं किया है। नतीजा रोज करोड़ों की दवाओं की बिलिंग हो रही है जो अवैध है।
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