Wednesday, February 2, 2011

अब मशरूम करेगा कैंसर की रोकथाम


अब मशरूम (खुम्ब) का उपयोग कैंसर जैसी असाध्य बीमारी की रोकथाम में भी किया जा सकेगा। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के वैज्ञानिकों ने मशरूम की ऐसी किस्म की खोज की है जो सामान्य मशरूम के मुकाबले ज्यादा औषधीय गुणों से युक्त है और इसके सेवन से कैंसर जैसी घातक बीमारियों पर आसानी लगाम लगाई जा सकेगी। औषधीय महत्व की इस मशरूम प्रजाति को मंकी हेड (हेरीसियम एरिनेकस) का नाम दिया गया है।
आईसीएआर के खुम्ब अनुसंधान निदेशालय, सोलन के निदेशक डॉ. मनजीत सिंह ने बताया कि औषधीय गुणों से भरपूर मंकी हेड मशरूम की प्रजाति लगभग लुप्त हो चुकी थी। वैज्ञानिकों ने अथक प्रयासों से सिर्फ इस प्रजाति को खोज निकाला बल्कि इसे विकसित करने में भी सफलता प्राप्त कर ली है। हिमाचल प्रदेश में सर्वेक्षण के दौरान मशरूम फुट बॉडी से टिश्यू कल्चर के जरिए इस नई प्रजाति का विकास किया गया है। शोध और अनुसंधान से यह तथ्य सामने आया है कि इस मशरूम के सेवन से अनेक प्रकार के कैंसर की रोकथाम संभव है। फिलहाल इस प्रजाति को बड़े स्तर पर विकसित किया जा रहा है ताकि इसका व्यवसायीकरण किया जा सके।

सिंह के अनुसार मंकी हेड मशरूम को गेहूं भूसी की खाद में 20 से 25 डिग्री सेल्सियस तापमान में उगाया जा सकेगा। अभी भारत सहित दुनियाभर में लकड़ी के बुरादे, गन्ने की खोई, कपास बीज के छिलके या धान के तने आदि की खाद का इस्तेमाल कर मशरूम का उत्पादन किया जा रहा है।
इसके साथ ही वैज्ञानिकों ने गुलाबी रंक के सीप ओएस्टर नाम की एक अन्य प्रजाति की मशरूम का भी विकास किया है। इसे टनल पास्चरीकृत तकनीक से तैयार किया गया है।
वैज्ञानिकों के मुताबिक मशरूम का ज्यादातर इस्तेमाल सब्जी के रूप में किया जा रहा है। इसमें बिटामिन बी-12, फोलिक एसिड और विटामिन डी जैसे पोषक तत्वों के अलावा रेशेदार तत्व और पोटेशियम भी मौजूद हैं। कम कैलोरी वाली यह सब्जी चिकनाई युक्त है। इसमे कॉलेस्ट्ररॉल भी नहीं होता है।

 

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