वह दिन दूर नहीं, जब एचआइवी का टीका भी हमारे पास होगा। जल्द ही हमारी उम्मीदों को पंख लगने वाला हैं। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आइसीएमआर) द्वारा एचआइवी (हयूमन इम्यूनो डिफिशिएंसी वायरस) के टीके (वैक्सीन) पर किए जा रहे परीक्षण का पहला चरण पूरा हो चुका है और इसके दूसरे चरण का ट्रायल अपने अंतिम दौर में है। देश में विकसित किए जा रहे इस टीके के पहले चरण में किसी भी प्रकार का अतिरिक्त प्रभाव (साइड इफेक्ट) का संकेत नहीं मिलने से हमारी उम्मीदें और बढ़ गई हैं। आइसीएमआर के महानिदेशक डॉ. वी. एम. कटोच का कहना है कि खुशी की बात यह है कि हमारी तीन साल की मेहनत रंग लाई है। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की मदद से दिसंबर 2010 में पहला चरण पूरा करने में सफल रहे हैं। डॉक्टर कटोच ने बताया कि परीक्षण के पहले चरण में सुरक्षा का काफी ध्यान रखा गया, जिसमें हम पूरी तरह से सफल भी रहे हैं। परीक्षण के दूसरे चरण में हम यह जांच कर रहे हैं कि इसका इम्यून पर कितना प्रभाव पड़ता है और यह टीका कितने प्रतिशत एंटीबॉडी बनाने में सक्षम हो पाती है। एक सवाल के जबाव में डॉक्टर का कहना था कि थाईलैंड में भी ऐसे ही एक टीके का परीक्षण किया गया था, जो केवल 30 प्रतिशत ही प्रभावित रही थी। लेकिन यहां हम इससे ज्यादा की उम्मीद कर रहे हैं ताकि हमारा टीका ज्यादा से ज्यादा प्रभावी हो। उन्होंने कहा कि अगले दो तीन महीने में हमें यह पता चल जाएगा कि इस टीके का प्रभाव किस स्तर पर होगा। अगर प्रतिशत का स्तर ज्यादा मिला तो उम्मीद है कि भारत में जितने भी प्रकार के एचआइवी विषाणु मिलते हैं, यह टीका उन सभी पर प्रभावी साबित होगा। इसके बाद इन टीकों का सबसे पहले प्रयोगशाला में परीक्षण करने के बाद पशुओं पर परीक्षण किया जाएगा। अगर परिणाम बेहतर मिला तो टीके का कई चरणों में मनुष्यों पर परीक्षण भी जाएगा। इसकी सफलता के बाद ही इसे लाइसेंस देकर बाजार में उतारने की अनुमति मिलेगी। डॉ. कटोच के अनुसार इस समय देश भर में एचआईवी संक्रमित लोगों की संख्या लगभग तीस लाख हैं|
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