Tuesday, February 22, 2011

एम्स डाक्टर नहीं कर सकते हड़ताल


दिल्ली उच्च न्यायालय ने फैसला दिया है कि एम्स के डाक्टर हड़ताल पर नहीं जा सकते है। साथ ही एम्स को निर्देश दिया है कि पिछले सालों में हड़ताल को विरोध का तरीका बनाने वाले डाक्टरों की पहचान करके उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा व न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की खंडपीठ ने कहा कि हड़ताल या प्रदर्शन में शामिल होने डाक्टर अदालत की अवमानना के जिम्मेदार होंगे। एम्स से जुड़े डाक्टर, रेजीडेंट, इंटर्न, मेडिकल स्टाफ व अन्य हड़ताल पर नहीं जा सकते हैं। उनका यह कदम अवैध होगा। खंडपीठ ने एम्स के प्रबंधन को कहा है कि वर्ष 2006 में ओबीसी के आरक्षण के विरोध में 17 दिन हड़ताल पर गए डाक्टरों की पहचान की जाए। इसके साथ ही वर्ष 2007 में एम्स के निदेशक पी वेणुगोपाल के हटाए जाने को लेकर किए गए दो दिन के प्रदर्शन में शामिल डाक्टरों का भी पता लगाया जाए। खंडपीठ ने कहा कि एम्स का प्रेसीडेंट उच्च स्तरीय कमेटी गठित करे, जो यह पता करेगी कि किन-किन लोगों ने पिछले सालों में हुई इन हड़ताल में भाग लिया है। इसके बाद इन सभी के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए। इतना ही नहीं इन डाक्टरों की पहचान होने के बाद एम्स मेडिकल काउंसिल एक्ट व दिल्ली मेडिकल काउंसिल एक्ट के अधिकारियों को भी सूचित कर दे ताकि वह इनके खिलाफ उचित कार्रवाई कर सके। यह आदेश अदालत ने एक जनहित याचिका पर दिया है जिसमें मांग की गई थी कि हड़ताल में शामिल होने व मरीजों का इलाज करने से मना करने वाले डाक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। खंडपीठ ने कहा कि एम्स से जुड़े लोगों को अपने काम के प्रति समर्पित होना चाहिए। उन्हें इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि देश के नागरिकों का स्वास्थ्य राष्ट्र की संपदा है। इसे जोखिम में नहीं डाला जा सकता है। यह एम्स के अधिकारियों की जिम्मेदारी बनती है कि वह इस बात का ध्यान रखे कि उनके संस्थान से जुड़ा कोई भी व्यक्ति इस तरह के धरने या प्रदर्शन में शामिल न हो। अन्यथा वह अनुशासनात्मक कार्रवाई और अदालत की अवमानना का जिम्मेदार होगा। खंडपीठ ने उस बात पर भी एम्स की खिंचाई की है जिसमें उसकी तरफ से दलील दी गई थी कि उन्होंने हड़ताल में शामिल डाक्टरों का कोई रिकार्ड तैयार नहीं किया है। वैसे भी अधिकतर डाक्टर संस्थान को छोड़ चुके हैं। अदालत ने कहा कि एम्स इस तरह की दलीलें देकर नहीं बच सकता है कि उन्हें नहीं पता कि असल में कौन-कौन हड़ताल में शामिल था। एससी एंव एसटी मेडिकल एसोसिएशन की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि डाक्टरों की हड़ताल गलत है। इस तरह हड़ताल पर जाने वाले डाक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।

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