Thursday, February 3, 2011

रुकने नहीं पाएगी आपकी धड़कन


वैज्ञानिकों का दावा है कि वह दिल से जुडे़ आयन चैनलों की क्रियाविधि को पता लगाने के बाद दिल की धड़कन की लय को समझने और उसे नियंत्रित करने के काफी करीब हैं। आयन चैनल वह क्रिया जिसके तहत दिल धड़कता है। इससे दिल के दौरों को रोकने में काफी मदद मिल सकती है। वैज्ञानिकों की एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने यह भी पता लगाया है कि एंटीबायोटिक्स और एंटीसाइकोटिक जैसी कई आम दवाएं किस प्रकार दिल की असामान्य धड़कन के लिए जिम्मेदार होती हैं। खोज के इन परिणामों से दिल की बीमारियों के लिए बेहतर और कारगर दवाएं बनाने में मदद मिल सकती है। वैज्ञानिकों के अनुमान के मुताबिक, 40 से 50 फीसदी दवाएं दिल को धड़काने वाले चैनलों में गतिरोध पैदा करती हैं। जिससे दिल का दौरा पड़ता है। इस स्थिति को कार्डियक एरिदमिया कहते हैं। कई बार कार्डियक एरिदमिया के चलते लोगों की मौत तक हो जाती है। इस खोज से जुड़े प्रमुख वैज्ञानिक, इंस्टीट्यूट इन सिडनी के विक्टर चेंग ने बताया कि हमने अपनी खोज में उन गेट्स (प्रवेशद्वार) की क्रियाविधि को समझ लिया है जो दिल की धड़कन पैदा करने वाले चैनलों को खोलने और बंद करने के लिए जिम्मेदार होते हैं। मुख्य अध्ययनकर्ता प्रोफेसर जेमी वान्डरबर्ग ने बताया कि यह बिल्कुल इसी तरह है कि जिस प्रकार हमारे घर में लगी बिजली की वायरिंग में करेंट आने से बल्ब जलता है और स्विच को बंद करने से बुझ जाता है। उन्होंने बताया कि हमारे शरीर में चैनलों की पूरी श्रृंखला होती है जिनसे आयन नामक सूक्ष्म विद्युतीय कण गुजरते हैं। इनके कारण ही दिल की धड़कने चलती हैं। इनके प्रवेशद्वार की स्थिति के आधार पर कई सामान्य दवाएं चैनलों पर बंद लगा देती हैं जिससे आयन इनके जरिए गुजर नहीं पाते। यह बाधा लंबे क्यूटी सिंड्रोम का कारण बनती है। ऐसे में दिल की धड़कन की लंबाई सामान्य से ज्यादा हो जाती है और एरेथीमिया का खतरा बढ़ जाता है।


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